होमी भाभा कैंसर अस्पताल एवं महामना पंडित मदन मोहन मालवीय कैंसर केंद्र (HBCH & MPMMCC), वाराणसी में कैनकिड्स किड्सकैन तथा एक्सिस बैंक के सहयोग से पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी नर्सेज़ वर्कशॉप का सफल आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य बाल कैंसर रोगियों की देखभाल में कार्यरत नर्सिंग अधिकारियों के ज्ञान, कौशल एवं व्यावहारिक दक्षता को सुदृढ़ बनाना था। कार्यक्रम का आयोजन डॉ. अमिता महेश्वरी, निदेशक, HBCH एवं MPMMCC के संरक्षण में किया गया। कार्यक्रम में डॉ. बी.के. मिश्रा, उप निदेशक, डॉ. शशिकांत पाटने, डीन अकादमिक्स, डॉ. राघवेश रंजन, प्रभारी, पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी विभाग, तथा डॉ. सौमित्र साहा, प्रोफेसर, पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग की महत्वपूर्ण सहभागिता रही। कार्यशाला का शुभारम्भ पंजीकरण एवं प्री-टेस्ट के साथ हुआ। इस अवसर पर डॉ. योगिता भाटिया ने कैनकिड्स किड्सकैन की गतिविधियों एवं बाल कैंसर देखभाल में प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों द्वारा बाल कैंसर की पहचान एवं उपचार, न्यूट्रोपेनिक फीवर का प्रबंधन, पोषण संबंधी देखभाल, रक्त एवं...
हमारा आयुष्मान कार्ड वापस ले लो। ये हमारे किसी काम का नहीं है। इसकी वजह से राष्ट्रीय आरोग्य निधि से भी इलाज के लिए पैसा नहीं मिल पा रहा है। ये कहना है दिल्ली एम्स में उपचाराधीन उन मरीजों का, जिनके इलाज में पांच लाख रुपये से भी ज्यादा का खर्चा आना है।
मरीज मोहम्मद अलाउद्दीन ने बताया कि उनकी बेटी को ब्लड कैंसर और इलाज के लिए आयुष्मान कार्ड का भी कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। एम्स के डॉक्टरों ने सात लाख रुपये का खर्च बताया है, जबकि इस कार्ड से पांच लाख रुपये का ही इलाज संभव है।
डॉक्टरों ने उन्हें बताया कि जिनके पास ये कार्ड है, उन्हें राष्ट्रीय आरोग्य निधि से भी कोई मदद नहीं मिल सकती है। ठीक ऐसी ही कहानी एप्लास्टिक एनीमिया पीड़ित 17 वर्षीय पंकज की है। उनके इलाज में 12 लाख रुपये का खर्चा आना है, जो आयुष्मान भारत योजना से उन्हें नहीं मिल सकता है।
डॉक्टरों का कहना है कि राष्ट्रीय आरोग्य निधि (आरएएन) से मरीज को 15 लाख रुपये मिल सकते हैं। क्योंकि ये बीपीएल कार्ड धारक हैं। मरीजों ने इसे लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और प्रधानमंत्री जनआरोग्य योजना के सीईओ डॉ. इंदु भूषण को भी पत्र लिखा है।
मरीज मोहम्मद अलाउद्दीन ने बताया कि उनकी बेटी को ब्लड कैंसर और इलाज के लिए आयुष्मान कार्ड का भी कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। एम्स के डॉक्टरों ने सात लाख रुपये का खर्च बताया है, जबकि इस कार्ड से पांच लाख रुपये का ही इलाज संभव है।
डॉक्टरों ने उन्हें बताया कि जिनके पास ये कार्ड है, उन्हें राष्ट्रीय आरोग्य निधि से भी कोई मदद नहीं मिल सकती है। ठीक ऐसी ही कहानी एप्लास्टिक एनीमिया पीड़ित 17 वर्षीय पंकज की है। उनके इलाज में 12 लाख रुपये का खर्चा आना है, जो आयुष्मान भारत योजना से उन्हें नहीं मिल सकता है।
डॉक्टरों का कहना है कि राष्ट्रीय आरोग्य निधि (आरएएन) से मरीज को 15 लाख रुपये मिल सकते हैं। क्योंकि ये बीपीएल कार्ड धारक हैं। मरीजों ने इसे लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और प्रधानमंत्री जनआरोग्य योजना के सीईओ डॉ. इंदु भूषण को भी पत्र लिखा है।
सरकारी नौकरी की पक्की तैया
Comments
Post a Comment