होमी भाभा कैंसर अस्पताल एवं महामना पंडित मदन मोहन मालवीय कैंसर केंद्र (HBCH & MPMMCC), वाराणसी में कैनकिड्स किड्सकैन तथा एक्सिस बैंक के सहयोग से पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी नर्सेज़ वर्कशॉप का सफल आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य बाल कैंसर रोगियों की देखभाल में कार्यरत नर्सिंग अधिकारियों के ज्ञान, कौशल एवं व्यावहारिक दक्षता को सुदृढ़ बनाना था। कार्यक्रम का आयोजन डॉ. अमिता महेश्वरी, निदेशक, HBCH एवं MPMMCC के संरक्षण में किया गया। कार्यक्रम में डॉ. बी.के. मिश्रा, उप निदेशक, डॉ. शशिकांत पाटने, डीन अकादमिक्स, डॉ. राघवेश रंजन, प्रभारी, पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी विभाग, तथा डॉ. सौमित्र साहा, प्रोफेसर, पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग की महत्वपूर्ण सहभागिता रही। कार्यशाला का शुभारम्भ पंजीकरण एवं प्री-टेस्ट के साथ हुआ। इस अवसर पर डॉ. योगिता भाटिया ने कैनकिड्स किड्सकैन की गतिविधियों एवं बाल कैंसर देखभाल में प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों द्वारा बाल कैंसर की पहचान एवं उपचार, न्यूट्रोपेनिक फीवर का प्रबंधन, पोषण संबंधी देखभाल, रक्त एवं...
मुकेश अंबानी के स्वामित्व वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज ने पिछले पांच सालों में सबसे ज्यादा पूंजी बनाई है। वहीं भारत में रहने वाले संपन्न वर्ग के लोगों की औसत पूंजी प्रत्याशा महज 3.6 करोड़ रुपये है। निवेश और बचत में इस्तेमाल की जाने वाली इस राशि से सेवानिवृत्ति के समय उन्हें 93 हजार रुपये प्रति महीने मिलेंगे।
मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने पिछले पांच वर्षों में सबसे ज्यादा पूंजी बनाई है। इस दौरान कंपनी का पूंजीकरण 5.6 लाख करोड़ रुपये बढ़ा है। मोतीलाल ओसवाल एनुअल वेल्थ क्रिएशन स्टडी-2019 के अनुसार, 2014-19 के दौरान टॉप-100 वेल्थ क्रिएटर्स ने कुल 49 लाख करोड़ रुपये की पूंजी जोड़ी है। बुधवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार, आरआईएल और इंडियाबुल्स वेंचर्स व इंडसइंड बैंक ने सबसे ज्यादा, सबसे तेज और स्थिर तरीके से पूंजी सृजन किया है। हालांकि, इस दौरान सरकारी कंपनियों की पूंजी में मामूली इजाफा हुआ और महज नौ सरकारी कंपनियों ने नई पूंजी जोड़ी।
वहीं वोडाफोन आइडिया, टाटा मोटर्स, ओएनजीसी, आर-कॉम, अडानी एंटरप्राइजेज, रिलायंस पावर और सन फार्मा की पूंजी में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली है।
मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने पिछले पांच वर्षों में सबसे ज्यादा पूंजी बनाई है। इस दौरान कंपनी का पूंजीकरण 5.6 लाख करोड़ रुपये बढ़ा है। मोतीलाल ओसवाल एनुअल वेल्थ क्रिएशन स्टडी-2019 के अनुसार, 2014-19 के दौरान टॉप-100 वेल्थ क्रिएटर्स ने कुल 49 लाख करोड़ रुपये की पूंजी जोड़ी है। बुधवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार, आरआईएल और इंडियाबुल्स वेंचर्स व इंडसइंड बैंक ने सबसे ज्यादा, सबसे तेज और स्थिर तरीके से पूंजी सृजन किया है। हालांकि, इस दौरान सरकारी कंपनियों की पूंजी में मामूली इजाफा हुआ और महज नौ सरकारी कंपनियों ने नई पूंजी जोड़ी।
वहीं वोडाफोन आइडिया, टाटा मोटर्स, ओएनजीसी, आर-कॉम, अडानी एंटरप्राइजेज, रिलायंस पावर और सन फार्मा की पूंजी में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली है।
पूंजी प्रत्याशा में हुई बढ़ोतरी
ब्रिटेन की वित्तीय सेवा कंपनी स्टैंडर्ड चार्टर्ड ने बुधवार को जारी रिपोर्ट में यह खुलासा किया है कि मालिकाना आर्थिक मॉडल को आधार बनाया गया है, जिसमें जीडीपी वृद्धि और ब्याज दर जैसे कारक भी शामिल हैं। इससे यह पता लगाने की कोशिश की गई है कि 60 वर्ष की उम्र तक कितनी पूंजी एकत्र किए जाने की संभावना है।
रिपोर्ट के अनुसार, उभरते समृद्ध वर्ग में 1.3 करोड़, समृद्ध वर्ग में 3.6 करोड़ और उच्च आय वर्ग वालों में 6.9 करोड़ रुपये की औसत पूंजी प्रत्याशा है।
इस पूंजी के साथ समृद्ध वर्ग को महज 93 हजार रुपये प्रति महीने मिलेंगे, जो उनकी मौजूदा आय और पूंजी प्रत्याशा से काफी कम है। रिपोर्ट में कहा गया है कि एक तिहाई यानी करीब 32 फीसदी लोग 60 साल की उम्र तक अपना आधा लक्ष्य पाने की राह पर हैं।
हालांकि, 68 फीसदी लोग अपने तय लक्ष्यों से काफी पीछे चल रहे हैं। लक्ष्य के बेहतर प्रबंधन और निवेश के तरीकों से इस अंतर में कमी आने की भी संभावना है। ऐसे लोगों को तत्काल इस दिशा में कदम उठाने होंगे।
रिपोर्ट के अनुसार, उभरते समृद्ध वर्ग में 1.3 करोड़, समृद्ध वर्ग में 3.6 करोड़ और उच्च आय वर्ग वालों में 6.9 करोड़ रुपये की औसत पूंजी प्रत्याशा है।
इस पूंजी के साथ समृद्ध वर्ग को महज 93 हजार रुपये प्रति महीने मिलेंगे, जो उनकी मौजूदा आय और पूंजी प्रत्याशा से काफी कम है। रिपोर्ट में कहा गया है कि एक तिहाई यानी करीब 32 फीसदी लोग 60 साल की उम्र तक अपना आधा लक्ष्य पाने की राह पर हैं।
हालांकि, 68 फीसदी लोग अपने तय लक्ष्यों से काफी पीछे चल रहे हैं। लक्ष्य के बेहतर प्रबंधन और निवेश के तरीकों से इस अंतर में कमी आने की भी संभावना है। ऐसे लोगों को तत्काल इस दिशा में कदम उठाने होंगे।
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