होमी भाभा कैंसर अस्पताल एवं महामना पंडित मदन मोहन मालवीय कैंसर केंद्र (HBCH & MPMMCC), वाराणसी में कैनकिड्स किड्सकैन तथा एक्सिस बैंक के सहयोग से पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी नर्सेज़ वर्कशॉप का सफल आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य बाल कैंसर रोगियों की देखभाल में कार्यरत नर्सिंग अधिकारियों के ज्ञान, कौशल एवं व्यावहारिक दक्षता को सुदृढ़ बनाना था। कार्यक्रम का आयोजन डॉ. अमिता महेश्वरी, निदेशक, HBCH एवं MPMMCC के संरक्षण में किया गया। कार्यक्रम में डॉ. बी.के. मिश्रा, उप निदेशक, डॉ. शशिकांत पाटने, डीन अकादमिक्स, डॉ. राघवेश रंजन, प्रभारी, पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी विभाग, तथा डॉ. सौमित्र साहा, प्रोफेसर, पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग की महत्वपूर्ण सहभागिता रही। कार्यशाला का शुभारम्भ पंजीकरण एवं प्री-टेस्ट के साथ हुआ। इस अवसर पर डॉ. योगिता भाटिया ने कैनकिड्स किड्सकैन की गतिविधियों एवं बाल कैंसर देखभाल में प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों द्वारा बाल कैंसर की पहचान एवं उपचार, न्यूट्रोपेनिक फीवर का प्रबंधन, पोषण संबंधी देखभाल, रक्त एवं...
विदेश में घूमने के शौकीन लोग मोटरहोम्स, कैंपर वैंन, कारवां का इस्तेमाल करते हैं। इनमें कारों या ट्रकों को घरों में कन्वर्ट किया जाता है। लेकिन कभी आपने किसी तिपहिया वाहन को घर में बदलने के बारे में सुना है। लेकिन बेंगलुरु में एक युवा ने जुगाड़ करके तिपहिया को घर में तब्दील कर दिया।
23 वर्षीय युवा का कमाल
23 वर्षीय युवा पीआर अरुण प्रभू ने बजाज आऱई थ्री-व्हीलर पिकअप को टेंटहाऊस में बदल दिया। तमिलनाडू के नमक्कल में पारामथी वेल्लोर के रहने वाले अरुण ने बिल्कुल नया कॉन्सेप्ट होम ऑन व्हील्स प्रोजेक्ट को हकीकत में तब्दील कर दिया।
पांच महीनों का लगा वक्त
बेंगलुरु की डिजाइन और आर्किटेक्ट कंपनी बिलबोर्ड्स से जुड़े अरुण की 'जुगाड़' प्रतिभा ने सभी को हैरान कर दिया है। उन्होंने तकरीबन पांच महीनों में कुछ लाख रुपयों से इसे संभव कर दिखाया है। बहुमुखी प्रतिभा के धनी अरुण अपनी जिंदगी में कुछ नया करना चाहते थे, तो उन्होंने होम ऑन व्हील्स पर कुछ करने की ठानी।
आसान नहीं था बनाना
अभी तक होम ऑन व्हील्स का ट्रेंड केवल चार पहिया वाहनों तक ही सीमित था। लेकिन जुड़ा से तिपहिया वाहन पर होम ऑन व्हील्स के कॉन्सैप्ट को सच कर दिखाया। हालंकि उनके बनाए तिपहिया वाहन वाले घर में स्थिरता, जगह की कमी थोड़ी खलती है, लेकिन खासियत यह है कि तिपहिया वाहन पर घर बनाना इतना आसान नहीं है।

पुराने बजाज थ्री-व्हीलर का किया इस्तेमाल
पुराने बजाज थ्रीव्हीलर पर उन्होंने बस के बेसिक फ्रेम वर्क को इस्तेमाल किया और उसके लोडिंग एरिया को खत्म कर दिया। उनकी कोशिश थी कि घूमने फिरने के शौकीनों के लिए लंबी यात्रा के दौरान आराम करने के लिए खास जगह बनाई जाए।
600 वॉट का सोलर पैनल
उनके तिपहिया घर में एक बेडरूम, बाथरूम, किचन, वर्कस्पेस, वाटर हीटर यहां तक कि टॉयलेट भी है। कुल मिला कर एक कमरे का घर उन्होंने थ्री-व्हीलर पर तैयार कर दिया। उनका कहना है कि यहां कोई प्राइवेसी नहीं है, क्योंकि पूरा केबिन ही प्राइवेसी कॉन्सेप्ट पर तैयार किया गया है। उनरे घर में 250 लीटर का वाटर टैंक, 600 वॉट का सोलर पैनल और बैटरियां, कपबोर्ड्स, बाहर की तरफ कपड़े सुखाने के लिए हैंगर, दरवाजे और सीढ़ियां हैं।
छह फुट का छाता
वहीं उन्होंने केबिन के ऊपर छह फुट ऊंचा का छाता भी लगाया है, जिसके नीचे आप लॉन्च चेयर पर आराम भी कर सकते हैं। घर को स्टैबिलिटी देने के लिए अलग से सपोर्ट दिया गया है।
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