होमी भाभा कैंसर अस्पताल एवं महामना पंडित मदन मोहन मालवीय कैंसर केंद्र (HBCH & MPMMCC), वाराणसी में कैनकिड्स किड्सकैन तथा एक्सिस बैंक के सहयोग से पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी नर्सेज़ वर्कशॉप का सफल आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य बाल कैंसर रोगियों की देखभाल में कार्यरत नर्सिंग अधिकारियों के ज्ञान, कौशल एवं व्यावहारिक दक्षता को सुदृढ़ बनाना था। कार्यक्रम का आयोजन डॉ. अमिता महेश्वरी, निदेशक, HBCH एवं MPMMCC के संरक्षण में किया गया। कार्यक्रम में डॉ. बी.के. मिश्रा, उप निदेशक, डॉ. शशिकांत पाटने, डीन अकादमिक्स, डॉ. राघवेश रंजन, प्रभारी, पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी विभाग, तथा डॉ. सौमित्र साहा, प्रोफेसर, पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग की महत्वपूर्ण सहभागिता रही। कार्यशाला का शुभारम्भ पंजीकरण एवं प्री-टेस्ट के साथ हुआ। इस अवसर पर डॉ. योगिता भाटिया ने कैनकिड्स किड्सकैन की गतिविधियों एवं बाल कैंसर देखभाल में प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों द्वारा बाल कैंसर की पहचान एवं उपचार, न्यूट्रोपेनिक फीवर का प्रबंधन, पोषण संबंधी देखभाल, रक्त एवं...
नए साल के स्वागत में जश्न के साथ आतिशबाजी की योजना बना रहे हैं तो जर्मनी के लोगों की इस पहल पर गौर करिएगा। जर्मनी के लोगों और पटाखा विक्रेताओं ने नए साल पर पर्यावरण की खातिर पटाखा न बेचने और न जलाने का फैसला कर दुनिया के सामने मिसाल पेश की है। लोगों का कहना है कि स्वच्छ वातावरण और शुद्ध हवा के लिए नए साल पर वे आतिशबाजी नहीं करेंगे और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करेंगे।
यूजीओवी के सर्वे के अनुसार दो हजार जर्मनी के लोगों ने कहा कि वे पर्यावरण की खातिर आतिशबाजी नहीं करेंगे। सर्वे में 57 फीसदी लोगों ने प्रदूषण से बचाव के लिए नए साल पर रोशनी और तेज आवाज वाले पटाखे न जलाने की बात कही है। वहीं सात फीसदी लोग ये तय नहीं कर पाए हैं कि वे पटाखे जलाएंगे या नहीं। वहीं 36 फीसदी लोग आतिशबाजी न करने के फैसले के खिलाफ हैं।
यूजीओवी के सर्वे के अनुसार दो हजार जर्मनी के लोगों ने कहा कि वे पर्यावरण की खातिर आतिशबाजी नहीं करेंगे। सर्वे में 57 फीसदी लोगों ने प्रदूषण से बचाव के लिए नए साल पर रोशनी और तेज आवाज वाले पटाखे न जलाने की बात कही है। वहीं सात फीसदी लोग ये तय नहीं कर पाए हैं कि वे पटाखे जलाएंगे या नहीं। वहीं 36 फीसदी लोग आतिशबाजी न करने के फैसले के खिलाफ हैं।
एक रात में पांच हजार प्रदूषित कण
जर्मन फेडरल एनवॉयरमेंट एजेंसी के अनुसार नए साल के स्वागत के दिन आतिशबाजी से एक रात में पांच हजार टन प्रदूषित कण पर्यावरण में घुल जाता है। ये दो महीने में ट्रैफिक के चलते होने वाले प्रदूषण के बराबर है। जर्मनी के 30 शहरों और नगर निकाय क्षेत्रों जिनमें राजधानी बर्लिन समेत हैमबर्ग, म्यूनिख, और कोलोग्ने में आतिशबाजी पर आशिंक या पूर्ण रूप से प्रतिबंध है।
365 दिन स्वच्छ हवा चाहते हैं
जर्मनी में सुपर मार्केट का और आतिशबाजी दुकानों संचालन करने वाले उली बुडनिक का कहना है कि 'हमने नए साल के आगमन से ऐन पहले अच्छा फैसला किया है। हम चाहते हैं कि हर इंसान और पशु स्वस्थ रहे। सभी को 365 दिन स्वच्छ हवा मिले इसी को देखते हुए इस बार हम पटाखों की बित्री नहीं करेंगे।'
महिलाएं बोलीं आतिशबाजी खतरनाक
नए साल पर होने वाली आतिशबाजी को 79 फीसदी लोगों ने खतरनाक माना। वहीं 84 फीसदी महिलाओं ने आतिशबाजी को घातक और स्वास्थ्य के लिए खतरनाक बताया। वहीं 10 में से सात लोगों ने माना कि आतिशबाजी काफी महंगी है और उसकी तेज आवाज 43 फीसदी लोगों की परेशानी का सबब है।
आज से शुरू होगी बिक्री
शनिवार से जर्मनी में रॉकेट और बड़े पटाखों की बिक्री शुरू होगी। छोटे पटाखों की बिक्री हर साल होती है लेकिन कुछ चुनिंदा दुकानों से ही खरीद सकते हैं। ये पटाखे दिसंबर के आखिरी तीन दिन ही जलाए जाएंगे।
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