होमी भाभा कैंसर अस्पताल एवं महामना पंडित मदन मोहन मालवीय कैंसर केंद्र (HBCH & MPMMCC), वाराणसी में कैनकिड्स किड्सकैन तथा एक्सिस बैंक के सहयोग से पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी नर्सेज़ वर्कशॉप का सफल आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य बाल कैंसर रोगियों की देखभाल में कार्यरत नर्सिंग अधिकारियों के ज्ञान, कौशल एवं व्यावहारिक दक्षता को सुदृढ़ बनाना था। कार्यक्रम का आयोजन डॉ. अमिता महेश्वरी, निदेशक, HBCH एवं MPMMCC के संरक्षण में किया गया। कार्यक्रम में डॉ. बी.के. मिश्रा, उप निदेशक, डॉ. शशिकांत पाटने, डीन अकादमिक्स, डॉ. राघवेश रंजन, प्रभारी, पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी विभाग, तथा डॉ. सौमित्र साहा, प्रोफेसर, पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग की महत्वपूर्ण सहभागिता रही। कार्यशाला का शुभारम्भ पंजीकरण एवं प्री-टेस्ट के साथ हुआ। इस अवसर पर डॉ. योगिता भाटिया ने कैनकिड्स किड्सकैन की गतिविधियों एवं बाल कैंसर देखभाल में प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों द्वारा बाल कैंसर की पहचान एवं उपचार, न्यूट्रोपेनिक फीवर का प्रबंधन, पोषण संबंधी देखभाल, रक्त एवं...
दिल्ली में रहने वाले लोग आमतौर पर चिलचिलाती गर्मी से राहत पाने के लिए हिल स्टेशन (पहाड़ी इलाका) जाते हैं। लेकिन पिछले कुछ दिनों में दिल्ली का तापमान किसी हिल स्टेशन से कहीं ज्यादा कम दर्ज किया गया है। यहां इतनी ठंड पड़ रही है कि 119 साल का रिकॉर्ड टूट गया है। पिछले कुछ दिनों से दिल्ली के कई हिस्सों में दिन और रात का तापमान मशहूर हिल स्टेशनों शिमला और मसूरी से ज्यादा ठंडा है।
वीकेंड (सप्ताहांत) में इन दोनों पहाड़ी शहरों में अधिकतम तापमान 14 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहा। दोनों दिन दिल्ली में स्थित मौसम विभाग के केंद्र में बहुत कम तापमान दर्ज किया गया। शनिवार को लगभग पूरी दिल्ली में अधिकतम तापमान 14 डिग्री से नीचे था। रविवार को कई मौसम केंद्रों- जफरपुर (11.6), मुंगेशपुर (11.9), पालम (13.5) सहित कई अन्य स्थानों पर 14 डिग्री से कम तापमान दर्ज किया गया।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, मौसम विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इसका मुख्य कारण मैदानी इलाकों में दिन के समय कोहरा छाया रहना है। जिसकी वजह से जमीन तक सूरज की रोशनी नहीं पहुंच रही और इसके अलावा ठंड से बचने के लिए लोगों द्वारा जलाए गए अलाव ने धुंध का एक कवर बनाने का काम किया। दिल्ली में रात का तापमान दो डिग्री के आसपास रहा जो शनिवार को दोनों हिल स्टेशन से नीचे था। रविवार को कई स्थानों का तापमान शिमला के अधिकतम 2.8 के आसपास रहा। वहीं कई स्थान मसूरी से भी ज्यादा ठंडे रहे।
उत्तरी मैदानी इलाकों में पिछले एक पखवाड़े से रोजाना सुबह कोहरे का असर दिखाई दे रहा है। जो दिन के समय एक ऊंचाई पर ऊपर उठ रहा है और कोहरे का या एक छोटे से क्लाउड (बादल) कवर का निर्माण कर रहा है। दिन के समय का यह कोहरा पाकिस्तान के पूर्वी क्षेत्रों से लेकर बिहार तक लगभग पूरे उत्तरी मैदानी इलाके को कवर कर रहा है। इस क्लाउड कवर के कारण सूरज की रोशनी जमीन तक नहीं पहुंच रही हैं। जिसके कारण दिन काफी ठिठुरन भरे होते हैं।
रविवार को यह क्लाउड कवर आंशिक रूप से छंटा जिसके कारण दिल्ली-एनसीआर में सूरज की रोशनी देखने को मिली। इसी कारण शनिवार की तुलना में दिन के तापमान में एक या दो पायदान की वृद्धि हुई। मौसम विभाग के क्षेत्रीय मौसम पूर्वानुमान केंद्र के प्रमुख कुलदीप श्रीवास्तव, 'यह धुंध/क्लाउड कवर आमतौर पर जमीन से कुछ मीटर की ऊंचाई पर ही होते हैं। 1,600-2,000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित हिल स्टेशनों को कवर करना मुश्किल होता है। वहीं पिछले कुछ दिनों से हिल स्टेशनों पर बारिश नहीं हुई है। जिसका मतलब है कि यदि शिमला और मसूरी में दिन के समय धुंध होती है तो दिन के समय यह ऊपर उठ जाता है और सूरज की रोशनी जमीन पर पड़ती है।'
वीकेंड (सप्ताहांत) में इन दोनों पहाड़ी शहरों में अधिकतम तापमान 14 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहा। दोनों दिन दिल्ली में स्थित मौसम विभाग के केंद्र में बहुत कम तापमान दर्ज किया गया। शनिवार को लगभग पूरी दिल्ली में अधिकतम तापमान 14 डिग्री से नीचे था। रविवार को कई मौसम केंद्रों- जफरपुर (11.6), मुंगेशपुर (11.9), पालम (13.5) सहित कई अन्य स्थानों पर 14 डिग्री से कम तापमान दर्ज किया गया।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, मौसम विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इसका मुख्य कारण मैदानी इलाकों में दिन के समय कोहरा छाया रहना है। जिसकी वजह से जमीन तक सूरज की रोशनी नहीं पहुंच रही और इसके अलावा ठंड से बचने के लिए लोगों द्वारा जलाए गए अलाव ने धुंध का एक कवर बनाने का काम किया। दिल्ली में रात का तापमान दो डिग्री के आसपास रहा जो शनिवार को दोनों हिल स्टेशन से नीचे था। रविवार को कई स्थानों का तापमान शिमला के अधिकतम 2.8 के आसपास रहा। वहीं कई स्थान मसूरी से भी ज्यादा ठंडे रहे।
उत्तरी मैदानी इलाकों में पिछले एक पखवाड़े से रोजाना सुबह कोहरे का असर दिखाई दे रहा है। जो दिन के समय एक ऊंचाई पर ऊपर उठ रहा है और कोहरे का या एक छोटे से क्लाउड (बादल) कवर का निर्माण कर रहा है। दिन के समय का यह कोहरा पाकिस्तान के पूर्वी क्षेत्रों से लेकर बिहार तक लगभग पूरे उत्तरी मैदानी इलाके को कवर कर रहा है। इस क्लाउड कवर के कारण सूरज की रोशनी जमीन तक नहीं पहुंच रही हैं। जिसके कारण दिन काफी ठिठुरन भरे होते हैं।
रविवार को यह क्लाउड कवर आंशिक रूप से छंटा जिसके कारण दिल्ली-एनसीआर में सूरज की रोशनी देखने को मिली। इसी कारण शनिवार की तुलना में दिन के तापमान में एक या दो पायदान की वृद्धि हुई। मौसम विभाग के क्षेत्रीय मौसम पूर्वानुमान केंद्र के प्रमुख कुलदीप श्रीवास्तव, 'यह धुंध/क्लाउड कवर आमतौर पर जमीन से कुछ मीटर की ऊंचाई पर ही होते हैं। 1,600-2,000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित हिल स्टेशनों को कवर करना मुश्किल होता है। वहीं पिछले कुछ दिनों से हिल स्टेशनों पर बारिश नहीं हुई है। जिसका मतलब है कि यदि शिमला और मसूरी में दिन के समय धुंध होती है तो दिन के समय यह ऊपर उठ जाता है और सूरज की रोशनी जमीन पर पड़ती है।'
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