होमी भाभा कैंसर अस्पताल एवं महामना पंडित मदन मोहन मालवीय कैंसर केंद्र (HBCH & MPMMCC), वाराणसी में कैनकिड्स किड्सकैन तथा एक्सिस बैंक के सहयोग से पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी नर्सेज़ वर्कशॉप का सफल आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य बाल कैंसर रोगियों की देखभाल में कार्यरत नर्सिंग अधिकारियों के ज्ञान, कौशल एवं व्यावहारिक दक्षता को सुदृढ़ बनाना था। कार्यक्रम का आयोजन डॉ. अमिता महेश्वरी, निदेशक, HBCH एवं MPMMCC के संरक्षण में किया गया। कार्यक्रम में डॉ. बी.के. मिश्रा, उप निदेशक, डॉ. शशिकांत पाटने, डीन अकादमिक्स, डॉ. राघवेश रंजन, प्रभारी, पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी विभाग, तथा डॉ. सौमित्र साहा, प्रोफेसर, पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग की महत्वपूर्ण सहभागिता रही। कार्यशाला का शुभारम्भ पंजीकरण एवं प्री-टेस्ट के साथ हुआ। इस अवसर पर डॉ. योगिता भाटिया ने कैनकिड्स किड्सकैन की गतिविधियों एवं बाल कैंसर देखभाल में प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों द्वारा बाल कैंसर की पहचान एवं उपचार, न्यूट्रोपेनिक फीवर का प्रबंधन, पोषण संबंधी देखभाल, रक्त एवं...
बॉम्बे हाईकोर्ट ने पांच साल की बच्ची से दुष्कर्म के आरोपी की सजा बरकरार रखते हुए कहा कि नाबालिगों से यौन अपराधों के दोषियों को 'निर्मम और कठोरतम' सजा मिलनी चाहिए। जस्टिस पृथ्वीराज चव्हाण की पीठ ने शुक्रवार को दोषी सागर धुरी (29) की विशेष अदालत के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी। विशेष अदालत ने सागर को दस साल की सजा सुनाई थी।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा, इस तरह के अपराधों से निपटने के लिए स्पष्ट व्यवस्था है। ऐसी मानसिकता वाले लोग सभ्य समाज के लिए खतरा हैं और इसलिए उन्हें निर्ममता के साथ कठोरतम सजा दी जानी चाहिए। इस मामले में याचिकाकर्ता के सुधार की कोई गुंजाइश नहीं है क्योंकि उसकी उम्र काफी है और उसे अपने कृत्य के नतीजे की भी जानकारी थी।
अभियोजन के मुताबिक, ठाणे जिले में सागर पीड़िता का पड़ोसी था। अप्रैल, 2015 में उसने बच्ची को मोबाइल पर गाना दिखाने के बहाने से बुलाया और उससे दुष्कर्म किया। बच्ची का एक दोस्त खेलने के लिए उसे ढूंढ रहा था और उसने बच्ची को दोषी के घर में देखा और एक महिला को इसके बारे में बताया।
महिला ने जब दोषी के घर के दरवाजे में छेद से अंदर झांका तो उसने सागर को बच्ची से दुष्कर्म करते हुए देखा। इसके बाद महिला ने आवाज लगाकर बच्ची को बाहर बुलाया और उसकी मां के पास ले गई। इसके बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई और आरोपी को हिरासत में लिया गया था।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा, इस तरह के अपराधों से निपटने के लिए स्पष्ट व्यवस्था है। ऐसी मानसिकता वाले लोग सभ्य समाज के लिए खतरा हैं और इसलिए उन्हें निर्ममता के साथ कठोरतम सजा दी जानी चाहिए। इस मामले में याचिकाकर्ता के सुधार की कोई गुंजाइश नहीं है क्योंकि उसकी उम्र काफी है और उसे अपने कृत्य के नतीजे की भी जानकारी थी।
अभियोजन के मुताबिक, ठाणे जिले में सागर पीड़िता का पड़ोसी था। अप्रैल, 2015 में उसने बच्ची को मोबाइल पर गाना दिखाने के बहाने से बुलाया और उससे दुष्कर्म किया। बच्ची का एक दोस्त खेलने के लिए उसे ढूंढ रहा था और उसने बच्ची को दोषी के घर में देखा और एक महिला को इसके बारे में बताया।
महिला ने जब दोषी के घर के दरवाजे में छेद से अंदर झांका तो उसने सागर को बच्ची से दुष्कर्म करते हुए देखा। इसके बाद महिला ने आवाज लगाकर बच्ची को बाहर बुलाया और उसकी मां के पास ले गई। इसके बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई और आरोपी को हिरासत में लिया गया था।
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