होमी भाभा कैंसर अस्पताल एवं महामना पंडित मदन मोहन मालवीय कैंसर केंद्र (HBCH & MPMMCC), वाराणसी में कैनकिड्स किड्सकैन तथा एक्सिस बैंक के सहयोग से पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी नर्सेज़ वर्कशॉप का सफल आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य बाल कैंसर रोगियों की देखभाल में कार्यरत नर्सिंग अधिकारियों के ज्ञान, कौशल एवं व्यावहारिक दक्षता को सुदृढ़ बनाना था। कार्यक्रम का आयोजन डॉ. अमिता महेश्वरी, निदेशक, HBCH एवं MPMMCC के संरक्षण में किया गया। कार्यक्रम में डॉ. बी.के. मिश्रा, उप निदेशक, डॉ. शशिकांत पाटने, डीन अकादमिक्स, डॉ. राघवेश रंजन, प्रभारी, पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी विभाग, तथा डॉ. सौमित्र साहा, प्रोफेसर, पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग की महत्वपूर्ण सहभागिता रही। कार्यशाला का शुभारम्भ पंजीकरण एवं प्री-टेस्ट के साथ हुआ। इस अवसर पर डॉ. योगिता भाटिया ने कैनकिड्स किड्सकैन की गतिविधियों एवं बाल कैंसर देखभाल में प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों द्वारा बाल कैंसर की पहचान एवं उपचार, न्यूट्रोपेनिक फीवर का प्रबंधन, पोषण संबंधी देखभाल, रक्त एवं...
शरद पवार ने हयात होटल में 162 विधायकों की मौजूदगी का प्रदर्शन करके साबित कर दिया है कि वे वाकई में मराठा 'सरदार' हैं। पवार ने बताया कि महाराष्ट्र राजनीति की चकाचौंध में चाहे जितना बदलाव आ गया हो, लेकिन अभी उनका कोई सानी नहीं है। एनसीपी उनकी है और पार्टी का करीब-करीब हर विधायक उनके नक्शे कदम पर है।
शरद पवार ने 1967 से लेकर आज तक कभी प्रदर्शन की राजनीति नहीं की है, लेकिन पहली बार उनके जीवन भर की राजनीतिक साख पर बन आई। वह खुद कहते हैं कि संसदीय इतिहास में उन्होंने कभी वेल में जाकर न मांग रखी और न विरोध दर्ज कराया। पवार के बारे में आम है कि वह राजनीति के चाणक्य हैं। महाराष्ट्र में सतारा समेत तमाम इलाके में शानदार पैठ रखते हैं। इस बार के विधानसभा चुनावों में उन्होंने न केवल शिवाजी के वंशज को चुनाव में हरवाया, बल्कि दमदार मुख्य विपक्षी नेता के रूप में डटे रहे। पवार ने यह ताकत ईडी का नोटिस मिलने के बाद भी दिखाई थी। अपने घर से खुद ईडी के दफ्तर के लिए निकल पड़े और फिर उनके खिलाफ उठता गुबार बैठ गया
शरद पवार ने 1967 से लेकर आज तक कभी प्रदर्शन की राजनीति नहीं की है, लेकिन पहली बार उनके जीवन भर की राजनीतिक साख पर बन आई। वह खुद कहते हैं कि संसदीय इतिहास में उन्होंने कभी वेल में जाकर न मांग रखी और न विरोध दर्ज कराया। पवार के बारे में आम है कि वह राजनीति के चाणक्य हैं। महाराष्ट्र में सतारा समेत तमाम इलाके में शानदार पैठ रखते हैं। इस बार के विधानसभा चुनावों में उन्होंने न केवल शिवाजी के वंशज को चुनाव में हरवाया, बल्कि दमदार मुख्य विपक्षी नेता के रूप में डटे रहे। पवार ने यह ताकत ईडी का नोटिस मिलने के बाद भी दिखाई थी। अपने घर से खुद ईडी के दफ्तर के लिए निकल पड़े और फिर उनके खिलाफ उठता गुबार बैठ गया
शरद पवार ने सभी विधायकों को उद्धव ठाकरे, सोनिया गांधी का नाम लेकर सौगंध दिलाई। यह संकेत है शिवसेना के साथ कांग्रेस और एनसीपी का किसी तरह का छुआछूत अब नहीं रह गया है। महाविकास अघाड़ी की सरकार बनने का यह साफ तौर पर संकेत है। इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की 'खौफ' की राजनीति वाली छवि से न डरने का संकेत है। माना जा रहा है कि पवार के नेतृत्व में उठाए गए इस कदम का भारतीय राष्ट्रीय राजनीति में गहरा असर पड़ सकता है, क्योंकि सभी एनसीपी विधायकों की जिम्मेदारी शरद पवार ने ली है। उन्होंने गलत करने वालों को सबक शिकाने का भी एलान किया है।
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