होमी भाभा कैंसर अस्पताल एवं महामना पंडित मदन मोहन मालवीय कैंसर केंद्र (HBCH & MPMMCC), वाराणसी में कैनकिड्स किड्सकैन तथा एक्सिस बैंक के सहयोग से पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी नर्सेज़ वर्कशॉप का सफल आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य बाल कैंसर रोगियों की देखभाल में कार्यरत नर्सिंग अधिकारियों के ज्ञान, कौशल एवं व्यावहारिक दक्षता को सुदृढ़ बनाना था। कार्यक्रम का आयोजन डॉ. अमिता महेश्वरी, निदेशक, HBCH एवं MPMMCC के संरक्षण में किया गया। कार्यक्रम में डॉ. बी.के. मिश्रा, उप निदेशक, डॉ. शशिकांत पाटने, डीन अकादमिक्स, डॉ. राघवेश रंजन, प्रभारी, पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी विभाग, तथा डॉ. सौमित्र साहा, प्रोफेसर, पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग की महत्वपूर्ण सहभागिता रही। कार्यशाला का शुभारम्भ पंजीकरण एवं प्री-टेस्ट के साथ हुआ। इस अवसर पर डॉ. योगिता भाटिया ने कैनकिड्स किड्सकैन की गतिविधियों एवं बाल कैंसर देखभाल में प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों द्वारा बाल कैंसर की पहचान एवं उपचार, न्यूट्रोपेनिक फीवर का प्रबंधन, पोषण संबंधी देखभाल, रक्त एवं...
ट्रस्ट बनने के बाद केंद्र की ओर से मंदिर के लिए सौंपी जाएगी जमीन जब तक ट्रस्ट का गठन नहीं हो जाता, भूमि रिसीवर के कब्जे में रहेगी सुप्रीमकोर्ट ने रामलला को मान्यता देते हुए हक में सुनाया था फैसला
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अयोध्या में अब सीधे राम मंदिर बनेगा। केंद्र सरकार की ओर से बनाए जाने वाले ट्रस्ट को जमीन सौंपी जाएगी। इसके अलावा प्रथम दृष्टया इस जमीन को लेकर अब कोई अन्य लिखा-पढ़ी नहीं होनी है।
कोर्ट ने रामलला विराजमान को कानूनी मान्यता देते हुए विवादित भूमि 2.77 एकड़ का मालिकाना हक उनको सौंप दिया। राजस्व विभाग के अफसरों का मानना है कि जमीन विराजमान रामलला के पक्ष में बनाए जाने वाले ट्रस्ट को सीधे सौंप दी जाएगी।
वहीं, जब तक ट्रस्ट नहीं बनता, भूमि रिसीवर के कब्जे में ही रहेगी। अधिगृहीत परिसर के रिसीवर व कमिश्नर मनोज मिश्र ने बताया कि जमीन केंद्र सरकार से बनने वाले ट्रस्ट को सीधे सौंप दी जाएगी। यह बात फैसले में लिखी है।
वहीं, जब तक ट्रस्ट नहीं बनता, भूमि रिसीवर के कब्जे में ही रहेगी। अधिगृहीत परिसर के रिसीवर व कमिश्नर मनोज मिश्र ने बताया कि जमीन केंद्र सरकार से बनने वाले ट्रस्ट को सीधे सौंप दी जाएगी। यह बात फैसले में लिखी है।
दूसरी बार अयोध्या में बैठाया गया स्पेशल अफसर
यह दूसरा मौका है जब कमिश्नर और रिसीवर के मौजूद रहते कोई स्पेशल अफसर अयोध्या में बैठाया गया। दोनों अफसर जिले में पहले तैनात रह चुके थे। यहां के बारे में अच्छी जानकारी रखते थे। 15 मार्च 2002 को आयोजित शिलादान कार्यक्रम के लिए पीएमओ में तैनात रहे आईएएस अफसर शत्रुघ्न सिंह को केंद्र सरकार ने यहां भेजा था जो पहले यहां कमिश्नर रह चुके थे।
उन्होंने शिलादान कार्यक्रम शांतिपूर्ण संपन्न कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। श्रीराम मंदिर आंदोलन के अग्रणी संत परमहंस रामचंद्र दास से शिलाएं उन्होंने ही केंद्र सरकार के प्रतिनिधि के रूप में प्राप्त करके मामले का पटाक्षेप कराया था।
इस बार अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट से आने वाले फैसले को लेकर वरिष्ठ आईएएस अफसर व अयोध्या के पूर्व डीएम एमपी अग्रवाल को विशेष कार्याधिकारी बनाकर अयोध्या भेजा गया। फैसले के दौरान वह अयोध्या में ही डटे रहे।
वर्तमान कमिश्नर मनोज मिश्र के 30 नवंबर को सेवानिवृत्त होने के बाद एमपी अग्रवाल यहां के कमिश्नर होंगे। वह केंद्र सरकार के रिसीवर भी होंगे। उन्होंने परिसर का निरीक्षण करने के साथ तकनीकी जानकारियां भी लेनी शुरू कर दी हैं।
उन्होंने शिलादान कार्यक्रम शांतिपूर्ण संपन्न कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। श्रीराम मंदिर आंदोलन के अग्रणी संत परमहंस रामचंद्र दास से शिलाएं उन्होंने ही केंद्र सरकार के प्रतिनिधि के रूप में प्राप्त करके मामले का पटाक्षेप कराया था।
इस बार अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट से आने वाले फैसले को लेकर वरिष्ठ आईएएस अफसर व अयोध्या के पूर्व डीएम एमपी अग्रवाल को विशेष कार्याधिकारी बनाकर अयोध्या भेजा गया। फैसले के दौरान वह अयोध्या में ही डटे रहे।
वर्तमान कमिश्नर मनोज मिश्र के 30 नवंबर को सेवानिवृत्त होने के बाद एमपी अग्रवाल यहां के कमिश्नर होंगे। वह केंद्र सरकार के रिसीवर भी होंगे। उन्होंने परिसर का निरीक्षण करने के साथ तकनीकी जानकारियां भी लेनी शुरू कर दी हैं।
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