
लोकसभा ने बुधवार को इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट या ई-सिगरेट पर प्रतिबंध लगाने वाला एक विधेयक पारित कर दिया। इस दौरान केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने कहा कि कंपनियों की ओर से इसे एक नए 'फैशन' के रूप में प्रचारित किया जा रहा है, यह विधेयक युवाओं को नशे के कुप्रभावों से बचाने वाला एक जरूरी उपाय था।
इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट का निषेध (उत्पादन, निर्माण, आयात, निर्यात, परिवहन, बिक्री, वितरण, भंडारण और विज्ञापन) विधेयक, 2019, 18 सितंबर को जारी एक अध्यादेश की जगह लाया गया है, जो इसे प्रतिबंधित करता है।
लोकसभा में यह विधेयक विपक्षी सदस्यों के अध्यादेश के विरोध करने के बावजूद ध्वनि मत से पारित किया गया। इसके साथ ही सदन ने विपक्षी सदस्यों द्वारा उठाए गए कई संशोधनों को भी खारिज कर दिया।
विधेयक के संबंध में बोलते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने तर्क दिया कि तंबाकू पर प्रतिबंधों की कमी को "नई लत शुरू करने" के लिए न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता। अपनी बात के समर्थन में उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति दसवीं मंजिल से या छठवीं मंजिल से गिरे, वह फर्श पर आकर घायलल होता ही जाता है।
उन्होंने कहा कि ई-सिगरेट को बढ़ावा देने के लिए युवाओं के समक्ष से फैशन के तौर पर प्रचारित-प्रसारित किया गया था, जो अंततः उन्हें नशीले पदार्थों की लत की ओर ले जाएगा, इसलिए इस पर प्रतिबंध लगाना आवश्यक था।
विपक्षी दलों सहित अधिकांश दलों ने इस विधेयक का समर्थन किया, लेकिन इसे कानून बनाने के लिए अध्यादेश लाने का रास्ता अपनाने के सरकार के फैसले पर सवाल भी उठाया। विपक्ष के तर्क का जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री हर्षवर्धन ने कहा कि "मैं देशवासियों के स्वास्थ्य के लिए असंवेदनशील नहीं हो सकता और अध्यादेश इस खतरनाक लत को रोकने का कदम था।
उन्होंने कहा कि भारत जैसे देश में अगर शराब और तम्बाकू जैसे खतरनाक मादक पदार्थों को लोगों द्वारा स्वीकार कर लिया जाता है, तो उन्हें जांचना मुश्किल हो जाता है, इसलिए बेहतर होगा कि ऐसे खतरनाक नशीले पदार्थों को उनके उपयोग से पहले ही रोक दिया जाए।
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