होमी भाभा कैंसर अस्पताल एवं महामना पंडित मदन मोहन मालवीय कैंसर केंद्र (HBCH & MPMMCC), वाराणसी में कैनकिड्स किड्सकैन तथा एक्सिस बैंक के सहयोग से पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी नर्सेज़ वर्कशॉप का सफल आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य बाल कैंसर रोगियों की देखभाल में कार्यरत नर्सिंग अधिकारियों के ज्ञान, कौशल एवं व्यावहारिक दक्षता को सुदृढ़ बनाना था। कार्यक्रम का आयोजन डॉ. अमिता महेश्वरी, निदेशक, HBCH एवं MPMMCC के संरक्षण में किया गया। कार्यक्रम में डॉ. बी.के. मिश्रा, उप निदेशक, डॉ. शशिकांत पाटने, डीन अकादमिक्स, डॉ. राघवेश रंजन, प्रभारी, पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी विभाग, तथा डॉ. सौमित्र साहा, प्रोफेसर, पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग की महत्वपूर्ण सहभागिता रही। कार्यशाला का शुभारम्भ पंजीकरण एवं प्री-टेस्ट के साथ हुआ। इस अवसर पर डॉ. योगिता भाटिया ने कैनकिड्स किड्सकैन की गतिविधियों एवं बाल कैंसर देखभाल में प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों द्वारा बाल कैंसर की पहचान एवं उपचार, न्यूट्रोपेनिक फीवर का प्रबंधन, पोषण संबंधी देखभाल, रक्त एवं...
दुनिया में कई ऐसी जगहें हैं, जो अपने आप में कई रहस्य समेटे हुए हैं। उन्ही जगहों में एक है मिस्र और वहां के पिरामिड। मिस्र की सबसे रहस्यमयी कलाकृति है 'द ग्रेट पिरामिड ऑफ गीजा', जो दुनिया के सात अजूबों में से एक है। वैसे तो यहां के पिरामिडों का इतिहास 4000 साल पुराना बताया जाता है, लेकिन आज भी इन पिरामिडों से जुड़े कई रहस्य हैं, जिनका बारे में सही जानकारी किसी को भी नहीं है।
बताया जाता है कि गीजा का महान पिरामिड 2560 ईसा पूर्व में बनवाया गया था। इसे कूफू पिरामिड के नाम से भी जाना जाता है। इस पिरामिड को प्राचीन मिस्र के राजा कूफू के शव के संरक्षण के लिए बनाया गया था।
गीजा के ग्रेट पिरामिड की ऊंचाई करीब 450 फीट है। वहीं इस पिरामिड का जो नीचे का भाग है, वो 13 एकड़ में फैला हुआ है, जो लगभग 16 फुटबॉल के मैदान जितना बड़ा है। इस पिरामिड को बनाने में 23 लाख पत्थर ब्लॉक्स का इस्तेमाल किया गया था, जिनका वजन करीब पांच अरब 21 करोड़ किलोग्राम है। इन पत्थरों में लाइमस्टोन और ग्रेनाइट शामिल हैं।
बताया जाता है कि गीजा का महान पिरामिड 2560 ईसा पूर्व में बनवाया गया था। इसे कूफू पिरामिड के नाम से भी जाना जाता है। इस पिरामिड को प्राचीन मिस्र के राजा कूफू के शव के संरक्षण के लिए बनाया गया था।
इस पिरामिड को बनाने में इस्तेमाल किए गए पत्थरों का वजन दो टन से लेकर 30 टन और कुछ पत्थरों का वजन तो 45 हजार किलो तक है। इसमें सबसे हैरानी की बात तो ये है कि आज के समय में भी किसी क्रेन से अधिकतम 20 हजार किलो तक का ही वजन उठाया जा सकता है, तो उस समय 45 हजार किलो वजन का पत्थर कैसे उठाकर लाया गया होगा।
गीजा के ग्रेट पिरामिड में कुल कितने तहखाने हैं, इसके बारे में तो कोई नहीं जानता, लेकिन अभी तक के शोध के मुताबिक इसमें तीन तहखाने मिले हैं- आधार तहखाना, राजा का तहखाना और रानी का तहखाना, लेकिन हैरान करने वाली बात ये है कि राजा के तहखाने में न तो राजा की ममी मिली और ना ही रानी के तहखाने में रानी की ममी, जबकि इस पिरामिड को राजा और रानी के शव के संरक्षण के लिए ही बनाया गया था।
इन पिरामिडों को ऐसी जगह पर बनाया गया है कि इन्हें इजराइल के पहाड़ों से भी देखा जा सकता है। ऐसा कहा जाता है कि मिस्त्र के ये पिरामिड चांद से भी दिखाई देते हैं।
गीजा के पिरामिड को इस तरह बनाया गया है कि इसके अंदर का तापमान हमेशा नियंत्रित रहता है। पिरामिड के बाहर का तापमान चाहे कितना भी हो, लेकिन इसके अंदर का तापमान हमेशा 20 डिग्री सेल्सियस ही रहता है। इसके अलावा यह
पिरामिड किसी भी तरह के भूकंप को झेल सकता है।
'द ग्रेट स्फिंक्स' पूरे मिस्र की सबसे आश्चर्यजनक मूर्ति है, जिसके बारे में आजतक कोई नहीं जान पाया कि यह किसके लिए बनाया गया था। 73 मीटर लंबी और 20 मीटर ऊंची इस मूर्ति की सबसे खास बात ये है कि इसे एक ही पत्थर को काटकर बनाया गया है। यह दुनिया की सबसे बड़ी एकल पत्थर की मूर्ति है, जिसे 4000 साल पहले बनाया गया था।
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