प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर तराई के जंगल को टाइगर रिजर्व का दर्जा मिलने के बाद बाघों का कुनबा भी बढ़ा है। शुरुआत में बाघों की संख्या घटती गई। मगर, बीते चार वर्षों में अनुकूल वातावरण के चलते टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या 55 से बढ़कर 65 हो गई है। टाइगर रिजर्व, वन विभाग के अफसरों ने बाघों के अलावा अन्य पशु-पक्षियों की संख्या बढ़ने को पर्यटन की दृष्टि से अनुकूल माना है।
नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (एनटीसीए) प्रत्येक चार साल में बाघों की गणना करता है। हालांकि, टाइगर रिजर्व में अभी बाघों की नई गणना के अधिकृत आंकड़े नहीं आए हैं, लेकिन वन विभाग के अफसरों का दावा है कि टाइगर रिजर्व में वन्य जीवों के शिकार पर सख्ती से अंकुश, आसपास गांवों में रहने वाले नागरिकों के सहयोग और मादा बाघिन के प्रजनन के अनुकूल वातावरण बनने से बाघों की संख्या बढ़कर 65 से ऊपर हो चुकी है।
तेंदुओं की संख्या 70 से 90 हुई
बाघ के अलावा टाइगर रिजर्व में तृणभोजी वन्यजीव हिरन, चौसिंगा और राष्ट्रीय पक्षी मोर की संख्या में भी 40 से 50 फीसदी तक इजाफा हुआ है। टाइगर रिजर्व के अफसरों के मुताबिक चूका बीच समेत माला, महोफ और अन्य वन रेंज क्षेत्र में तेंदुओं की संख्या बढ़ी है। चार साल पहले तक टाइगर रिजर्व में 70 तेंदुए थे, वहीं अब इनकी संख्या 90 हो गई है। देश-विदेश से आने वाले पर्यटक टाइगर रिजर्व में बाघ, तेंदुए, मगरमच्छ, प्रवासी पक्षियों को देखने के अलावा राष्ट्रीय पक्षी मोर को नाचते हुए पलों को कैमरों में कैद करने का मन बनाकर आते हैं। पर्यटकों को यह नजारा अब आसानी से दिखने की संभावना है।
चौसिंगा की मौजूदगी भी खास
राजस्थान जैसे सूखे और खुले क्षेत्र में पाए जाने वाली विलुप्त प्रजाति चौसिंगा की टाइगर रिजर्व के जंगल में अच्छी संख्या है। सूत्रों की मानें तो फिलहाल 50 चौसिंगा जंगल में हैं। वहीं, यहां हिरन की भी 5 प्रजातियां पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहेंगी। इनमें सांभर, बारहसिंघा, चीतल, पाढ़ा और कांकड़ शामिल हैं।
वर्ष 2016 से लेकर 2019 तक की गणना के आंकड़े
चीतल- 4104- 5276
सांभर 195- 231
चौसिंगा- 3-10
बारहसिंगा- 561-845
भालू- 84
मोर- 2680
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