होमी भाभा कैंसर अस्पताल एवं महामना पंडित मदन मोहन मालवीय कैंसर केंद्र (HBCH & MPMMCC), वाराणसी में कैनकिड्स किड्सकैन तथा एक्सिस बैंक के सहयोग से पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी नर्सेज़ वर्कशॉप का सफल आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य बाल कैंसर रोगियों की देखभाल में कार्यरत नर्सिंग अधिकारियों के ज्ञान, कौशल एवं व्यावहारिक दक्षता को सुदृढ़ बनाना था। कार्यक्रम का आयोजन डॉ. अमिता महेश्वरी, निदेशक, HBCH एवं MPMMCC के संरक्षण में किया गया। कार्यक्रम में डॉ. बी.के. मिश्रा, उप निदेशक, डॉ. शशिकांत पाटने, डीन अकादमिक्स, डॉ. राघवेश रंजन, प्रभारी, पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी विभाग, तथा डॉ. सौमित्र साहा, प्रोफेसर, पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग की महत्वपूर्ण सहभागिता रही। कार्यशाला का शुभारम्भ पंजीकरण एवं प्री-टेस्ट के साथ हुआ। इस अवसर पर डॉ. योगिता भाटिया ने कैनकिड्स किड्सकैन की गतिविधियों एवं बाल कैंसर देखभाल में प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों द्वारा बाल कैंसर की पहचान एवं उपचार, न्यूट्रोपेनिक फीवर का प्रबंधन, पोषण संबंधी देखभाल, रक्त एवं...
देश में जल्द 80 फीसदी दवाओं की कीमतों में कमी आ सकती है। दवा निर्माता कंपनियों और कारोबारियों ने मूल्य नियंत्रण से बाहर रहने वाली दवाओं पर ट्रेड मार्जिन 30 फीसदी तक सीमित रखने पर सहमति जता दी है। केंद्र सरकार ने यह प्रस्ताव दवा उद्योग को दिया था, जिसकी स्वीकृति के बाद दवाएं सस्ती होने की उम्मीद है।
दवा मूल्य नियामक, फॉर्मा कंपनियों और उद्योग संगठनों के बीच पिछले शुक्रवार को हुई बैठक में ट्रेड मार्जिन घटाने के प्रस्ताव पर सहमति जताई गई। इंडियन ड्रग मैन्यूफैक्चर्स एसोसिएशन का कहना है कि ट्रेड मार्जिन घटाने से हमें कोई गुरेज नहीं है, लेकिन अन्य उत्पादों पर इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाना चाहिए। मामले से जुड़े सूत्रों का कहना है कि तमाम भारतीय और बहुराष्ट्रीय दवा कंपनियां ट्रेड मार्जिन 30 तक सीमित करने पर पहले से राजी थीं। गौरतलब है कि दवा कंपनियां जिस दाम पर स्टॉकिस्ट को माल बेचती हैं और जो दाम ग्राहक से वसूला जाता है, उसके अंतर को ही ट्रेड मार्जिन कहा जाता है।
दवा मूल्य नियामक, फॉर्मा कंपनियों और उद्योग संगठनों के बीच पिछले शुक्रवार को हुई बैठक में ट्रेड मार्जिन घटाने के प्रस्ताव पर सहमति जताई गई। इंडियन ड्रग मैन्यूफैक्चर्स एसोसिएशन का कहना है कि ट्रेड मार्जिन घटाने से हमें कोई गुरेज नहीं है, लेकिन अन्य उत्पादों पर इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाना चाहिए। मामले से जुड़े सूत्रों का कहना है कि तमाम भारतीय और बहुराष्ट्रीय दवा कंपनियां ट्रेड मार्जिन 30 तक सीमित करने पर पहले से राजी थीं। गौरतलब है कि दवा कंपनियां जिस दाम पर स्टॉकिस्ट को माल बेचती हैं और जो दाम ग्राहक से वसूला जाता है, उसके अंतर को ही ट्रेड मार्जिन कहा जाता है।
बड़ी कंपनियों पर ज्यादा असर
सरकार के इस कदम से जेनरिक क्षेत्र के साथ बड़ी फार्मा कंपनियों जैसे सन फार्मा, सिप्ला व ल्यूपिन पर ज्यादा असर पड़ने की संभावना है। उन्हें अपने उत्पादों का अधिकतम खुदरा मूल्य घटाना पडे़गा। इससे उपभोक्ताओं को लाभ मिलेगा और दवा उद्योग को भी बढ़ावा मिलेगा। हालांकि, कुछ विश्लेषकों का मानना है कि इससे दवाओं की कीमत पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि मूल्य नियंत्रण से बाहर रहने वाली अधिकतर दवाओं पर पहले से 30 फीसदी ट्रेड मार्जिन लागू है। इसमें रिटेलर का 20 फीसदी और होलसेलर का 10 फीसदी मार्जिन होता है।
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