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बाल कैंसर देखभाल को मिलेगी मजबूती: HBCH वाराणसी में नर्सिंग वर्कशॉप संपन्न, 95 नर्सों ने सीखे एडवांस स्किल

होमी भाभा कैंसर अस्पताल एवं महामना पंडित मदन मोहन मालवीय कैंसर केंद्र (HBCH & MPMMCC), वाराणसी में कैनकिड्स किड्सकैन तथा एक्सिस बैंक के सहयोग से पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी नर्सेज़ वर्कशॉप का सफल आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य बाल कैंसर रोगियों की देखभाल में कार्यरत नर्सिंग अधिकारियों के ज्ञान, कौशल एवं व्यावहारिक दक्षता को सुदृढ़ बनाना था। कार्यक्रम का आयोजन डॉ. अमिता महेश्वरी, निदेशक, HBCH एवं MPMMCC के संरक्षण में किया गया। कार्यक्रम में डॉ. बी.के. मिश्रा, उप निदेशक, डॉ. शशिकांत पाटने, डीन अकादमिक्स, डॉ. राघवेश रंजन, प्रभारी, पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी विभाग, तथा डॉ. सौमित्र साहा, प्रोफेसर, पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग की महत्वपूर्ण सहभागिता रही। कार्यशाला का शुभारम्भ पंजीकरण एवं प्री-टेस्ट के साथ हुआ। इस अवसर पर डॉ. योगिता भाटिया ने कैनकिड्स किड्सकैन की गतिविधियों एवं बाल कैंसर देखभाल में प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों द्वारा बाल कैंसर की पहचान एवं उपचार, न्यूट्रोपेनिक फीवर का प्रबंधन, पोषण संबंधी देखभाल, रक्त एवं...

कोरोना वायरस एक नहीं, बल्कि तीन तरह के होते हैं ,अमेरिका में कोरोना वायरस का टाइप-ए ही मचा रहा है तबाही


इटली के बाद अमेरिका में कोरोना वायरस के कारण सबसे ज्यादा मौतें हुई हैं। ऐसे में यह सवाल उठता है जो कि जो देश सबसे शक्तिशाली है, जिसके यहां स्वास्थ्य सेवाएं अन्य के मुकाबले बेहतर हैं, वहां इतनी मौतें कैसे हो रही हैं। इसका जवाब अब मिल गया है।


एक नई रिसर्च में दावा किया गया है कि कोरोना वायरस एक नहीं, बल्कि तीन तरह के होते हैं जिनमें टाइप-ए, टाइप-बी और टाइप-सी शामिल हैं। इनमें से टाइप-ए सबसे ज्यादा खतरनाक है। बता दें कि अमेरिका में कोरोना वायरस का टाइप-ए ही तबाही मचा रहा है। कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी की एक स्टडी में कोरोना के तीन टाइप के बारे में जानकारी दी गई है। आइए जानते हैं तीनों के बारे में विस्तार से.


कोरोना का कौन-सा टाइप कहां से आया?


  1. कोरोना टाइप-ए- स्टडी के मुताबिक कोरोना वायरस का टाइप-ए चमगादड़ और पैंगोलीन से इंसानों आया है। कोरोना का टाइप-ए सबसे खतरनाक है और वुहान के बाद यह अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया में तबाही मचा रहा है। टाइप-ए की वजह से ही अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में करीब 4,00,000 लोगों में संक्रमण फैला है। अमेरिका में दो-तिहाई संक्रमण टाइप-ए ही है।

  2. कोरोना टाइप-बी- माना जा रहा है कि यह टाइप-ए से पैदा हुआ है और वुहान में इसने ही तबाही मचाई थी।

  3. कोरोना टाइप-सी- वायरस के तीसरे टाइप को टाइप बी की बेटी कहा जा रहा है। सिंगापुर और यूरोप में टाइप-सी फैला है। 



शोध में शामिल डॉक्टर पीटर फोर्स्टर और उनकी टीम ने पाया कि ब्रिटेन में कोरोना वायरस के अधिकतर मामले टाइप-बी से संबंधित हैं। इसके अलावा स्विट्जरलैंड, जर्मनी, फ्रांस, बेल्जियम और नीदरलैंड भी टाइप-बी ही फैला है। शोधकर्ताओं का मानना है कि कोरोना के अलग-अलग टाइप अलग-अलग देशों के लोगों की प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) के हिसाब से प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

रिसर्च में कहा गया है कि अमेरिका में कोरोना वायरस चीन से पहुंचा, लेकिन इस वायरस से चीन के मुकाबले अमेरिका को ज्यादा नुकसान हुआ। कोरोना वायरस के संक्रमण की चेन का पता लगाने के लिए पहली बार एल्गोरिदम का प्रयोग किया गया है। बता दें कि एल्गोरिदम का प्रयोग आमतौर पर इंसान की हजारों साल पुरानी प्रजाति के बारे में पता लगाने के लिए किया जाता है।

कोरोना की जेनेटिक हिस्ट्री जानने के लिए 24 दिसंबर से 4 मार्च के बीच स्टडी हुई जिससे पता चला कि अमेरिका में संक्रमण चीन के अलावा यूरोप से आए लोगों के जरिए फैला। आपको याद दिला दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन से आने वाले लोगों पर 31 जनवरी को ही प्रतिबंध लगा दिया था, जबकि यूरोप से आने वालों के लिए अमेरिका का दरवाजा 10 मार्च तक खुला था।

ऐसे में देखा जाए तो इटली से अमेरिका लौटने वालों के कारण ही अमेरिका में संक्रमण सबसे ज्यादा फैला। अमेरिका में सबसे अधिक मौत होने की वजह यह है कि यहां कोरोना का टाइप-ए और टाइप-बी दोनों फैला है। शोध से पता चला है कि टाइप-बी पूरी दुनिया में तेजी से फैल रहा है। भारत की बात करें तो यहां कोरोना फिलहाल सिंगल म्यूटेशन में है जिसका मतलब यह है कि वह अपना रूप नहीं बदल पा रहा है।

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