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बाल कैंसर देखभाल को मिलेगी मजबूती: HBCH वाराणसी में नर्सिंग वर्कशॉप संपन्न, 95 नर्सों ने सीखे एडवांस स्किल

होमी भाभा कैंसर अस्पताल एवं महामना पंडित मदन मोहन मालवीय कैंसर केंद्र (HBCH & MPMMCC), वाराणसी में कैनकिड्स किड्सकैन तथा एक्सिस बैंक के सहयोग से पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी नर्सेज़ वर्कशॉप का सफल आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य बाल कैंसर रोगियों की देखभाल में कार्यरत नर्सिंग अधिकारियों के ज्ञान, कौशल एवं व्यावहारिक दक्षता को सुदृढ़ बनाना था। कार्यक्रम का आयोजन डॉ. अमिता महेश्वरी, निदेशक, HBCH एवं MPMMCC के संरक्षण में किया गया। कार्यक्रम में डॉ. बी.के. मिश्रा, उप निदेशक, डॉ. शशिकांत पाटने, डीन अकादमिक्स, डॉ. राघवेश रंजन, प्रभारी, पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी विभाग, तथा डॉ. सौमित्र साहा, प्रोफेसर, पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग की महत्वपूर्ण सहभागिता रही। कार्यशाला का शुभारम्भ पंजीकरण एवं प्री-टेस्ट के साथ हुआ। इस अवसर पर डॉ. योगिता भाटिया ने कैनकिड्स किड्सकैन की गतिविधियों एवं बाल कैंसर देखभाल में प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों द्वारा बाल कैंसर की पहचान एवं उपचार, न्यूट्रोपेनिक फीवर का प्रबंधन, पोषण संबंधी देखभाल, रक्त एवं...

जनाब रहते हैं हावड़ जनिये लीप ईयर बोस के बारे में


आज 29 फरवरी है यानी 'लीप ईयर डे'। ऐसी तारीख, जो चार साल में एक बार ही आती है। यूं तो इस दिन जन्म लेने वालों की कमी नहीं है, पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई से लेकर न जाने और कितने। इन्हीं में से एक हैं लीप ईयर बोस। लेकिन हावड़ा (बंगाल) का यह शख्स इस मामले में सबसे जुदा है क्योंकि सिर्फ उनका जन्म ही लीप ईयर डे पर नहीं हुआ बल्कि नामकरण भी इसी दिन पर आधारित है। जी हां, यह हैं श्रीमान लीप ईयर बोस। आइये मिलते हैं..।


चौंकिए मत, इनका यही नाम है। लीप ईयर बोस। यह कोई शौकिया रखा गया उपनाम नहीं है, बल्कि शत-प्रतिशत आधिकारिक नाम है। उनके जन्म प्रमाणपत्र, स्कूल सर्टिफिकेट, आधार-वोटर-राशन कार्ड से लेकर तमाम दस्तावेज इसी नाम से हैं। अपने नाम से ही वह अपने जन्म की खासियत बयां कर देते हैं। 64 साल के लीप ईयर बोस पेशे से शिक्षक हैं। हावड़ा के सलकिया एंग्लो संस्कृत हाई स्कूल में पिछले 22 वषरें से संस्कृत पढ़ाते आ रहे हैं। इसी स्कूल से उन्होंने पढ़ाई भी की है।


 

सलकिया इलाके के उपेंद्रनाथ मित्रा लेन के रहने वाले 64 साल के इस सहज-सरल स्वभाव के इंसान को मुहल्ले के लोग लीप ईयर दादा कहकर संबोधित करते हैं और छात्र लीप ईयर सर।


लीप ईयर बोस का नामकरण उनके फैमिली डॉक्टर डॉ. विमलेंदु दे सरकार ने किया। 29 जनवरी, 1956 को उनका जन्म हुआ तो प्रसव कराने वाले डॉक्टर बाबू को ही नाम सुझाने को कहा गया। डॉक्टर बाबू ने झट से कह दिया कि लीप ईयर में पैदा हुआ है, तो इसका नाम लीप ईयर ही रख दिया जाए। चूंकि उनके माता-पिता डॉक्टर बाबू का बहुत सम्मान करते थे इसलिए वे खुशी-खुशी इसके लिए राजी हो गए।भले चार साल में एक बार जन्मदिन आता हो, लेकिन लीप ईयर बाबू को इसका जरा भी दुख नहीं है। उन्होंने कहा- बचपन में मेरे दोस्त मुझे बोलते थे कि तुम्हारा जन्मदिन हर साल नहीं आता, लेकिन मैं उनकी बातों पर ध्यान नही देता था। मैंने 29 फरवरी छोड़कर और किसी दिन को अपना जन्मदिवस माना भी नहीं। चार साल बाद-बाद जन्मदिन आने पर भी मैंने कभी इसे धूमधाम से नहीं मनाया। आज भी बहुत सादे तरीके से ही मनाने की योजना है। परिवार के लोग, करीबी जनों, स्कूल के अध्यापकों व छात्रों को मिठाइयां खिलाकर इसे मनाऊंगा। लीप ईयर बोस के परिवार में पत्नी व एक बेटा है। पिता दुर्गाचरण बोस निजी कंपनी में काम करते थे जबकि मां शेफाली बसु आम गृहिणी थीं। लीप ईयर बाबू को घूमने-फिरने का बेहद शौक है।


 


नाम ही मेरी पहचान है..


लीप ईयर बाबू कहते हैं, मुझे अपने इस अलग से नाम को लेकर कोई परेशानी नहीं है। मैंने इसे सहर्ष स्वीकार किया है और कभी बदलने के बारे में सोचा भी नहीं। यह मेरे बड़ों का दिया गया नाम है और मेरे जन्म के खास दिन पर आधारित है इसलिए बदलने के बारे में सोच भी नहीं सकता था। अब तो नाम ही मेरी पहचान है। किसी से भी यह नाम पूछो तो झट से मेरे घर का पता बता देता है।


 


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