लखनऊ, देश के दिग्गज नेता और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के संस्थापक, पूर्व केंद्रीय मंत्री पद्म भूषण स्व. रामविलास पासवान जी की आज 6वीं पुण्यतिथि है। उनकी पुण्यतिथि पर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक भावपूर्ण श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के आयोजक स्वयं उनके पुत्र और केंद्र सरकार में मंत्री चिराग पासवान थे। सभा में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुख्य रूप से शामिल हुए और स्व. पासवान के चित्र पर पुष्पमाला अर्पित कर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। मुख्यमंत्री के पहुंचने पर चिराग पासवान ने भावुक होते हुए सोशल मीडिया पर आभार जताया। चिराग ने एक्स पर लिखा - *"योगी जी ने अपना बहुमूल्य समय निकालकर पापा को श्रद्धांजलि दी। उनका खुद आकर श्रद्धांजलि देना मेरे और मेरे परिवार के लिए सम्मान का क्षण है। इससे साफ है कि पापा और योगी जी का रिश्ता सिर्फ राजनीति का नहीं, बल्कि व्यक्तिगत स्नेह और आत्मीयता का था।"* स्व. रामविलास पासवान को दलितों-पिछड़ों की आवाज माना जाता था और उन्होंने अपना पूरा जीवन भारत रत्न बाबा साहब अंबेडकर के सपनों को पूरा करने में लगा दिय...
हिमाचल की छोटी काशी मंडी में अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव पर ब्यासघाट स्थित एकादश रुद्र मंदिर में ओम नम: शिवाय जाप 14 फरवरी को सुबह नौ बजे से होगा। यह 22 फरवरी तक चलेगा। 24 ब्राह्मण दिन-रात बारी-बारी गद्दी पर बैठकर ज्योति के समक्ष यह जाप करेंगे। इस दौरान रुद्र मंदिर में अखंड ज्योति जलाई जाएगी।
एकादश रुद्र मंदिर के पुजारी स्वामी सतसुंदरम ने बताया कि शिवरात्रि महोत्सव पर मंदिर में सुबह नौ बजे अखंड ज्योति का शुभारंभ उपायुक्त ऋग्वेद ठाकुर करेंगे। उन्होंने बताया कि एक सप्ताह के पश्चात महाशिवरात्रि पर्व के दिन एकादश रुद्र भगवान का जलाभिषेक कर शृंगार किया जाएगा।
एकादश रुद्र मंदिर के पुजारी स्वामी सतसुंदरम ने बताया कि शिवरात्रि महोत्सव पर मंदिर में सुबह नौ बजे अखंड ज्योति का शुभारंभ उपायुक्त ऋग्वेद ठाकुर करेंगे। उन्होंने बताया कि एक सप्ताह के पश्चात महाशिवरात्रि पर्व के दिन एकादश रुद्र भगवान का जलाभिषेक कर शृंगार किया जाएगा।
पंचायत शैली का है एकादश रुद्र मंदिर
छोटी काशी में अनेक शिव मंदिर हैं। इनमें कई मंदिर ऐसे हैं, जहां पूरा साल धार्मिक गतिविधियां चलती रहती हैं। ब्यास नदी के किनारे झरनों के बीच स्थित एकादश रुद्र मंदिर पंचायत शैली में बनाया गया है। मंदिर का निर्माण बलवीर सेन की मां साहिबीनी ने करवाया था।
इसे शहरवासी साहिबीनी का शिवाद्वाला भी कहते हैं। साहिबीनी मंडी के राजा रहे विजय सेन की दादी थीं। कहा जाता है कि 1818 ई के आसपास एकादश रुद्र मंदिर का निर्माण किया गया था। इसमें 11 रुद्र वाले भगवान स्थापित हैं। हर रोज सुबह-शाम पूजा-अर्चना होती है।
ब्यास किनारे स्थापित होने से मंदिर का नजारा देखने वर्ष भर पर्यटकों का आना रहता है। मंदिर में सावन मास में एक माह तक भंडारा और सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं। शिवरात्रि महोत्सव व अन्य धार्मिक पर्वों में मंदिर में भक्तों का तांता लगा रहता है।
इसे शहरवासी साहिबीनी का शिवाद्वाला भी कहते हैं। साहिबीनी मंडी के राजा रहे विजय सेन की दादी थीं। कहा जाता है कि 1818 ई के आसपास एकादश रुद्र मंदिर का निर्माण किया गया था। इसमें 11 रुद्र वाले भगवान स्थापित हैं। हर रोज सुबह-शाम पूजा-अर्चना होती है।
ब्यास किनारे स्थापित होने से मंदिर का नजारा देखने वर्ष भर पर्यटकों का आना रहता है। मंदिर में सावन मास में एक माह तक भंडारा और सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं। शिवरात्रि महोत्सव व अन्य धार्मिक पर्वों में मंदिर में भक्तों का तांता लगा रहता है।
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