लखनऊ, 15 अगस्त 2026। समाज सेवा के क्षेत्र में सक्रिय दशमेश पब्लिक स्कूल, गुरुद्वारा आलमबाग, लखनऊ में 80वाँ स्वतंत्रता दिवस समारोह बड़े ही हर्षोल्लास एवं देशभक्ति की भावना के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ श्रीमती लिली सेठी, बलजीत कौर, गगनप्रीत कौर, जगजीत कौर, सिमरन कौर एवं सुनयना कौर ने मुख्य अतिथि के रूप में सामूहिक ध्वजारोहण कर किया। इस अवसर पर स्कूल के प्रबन्धक सरदार निर्मल सिंह ने विद्यार्थियों को स्वतंत्रता दिवस की बधाई देते हुए कहा कि हमें अपने अतीत और स्वतंत्रता संग्राम के बलिदानों को कभी नहीं भूलना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज़ादी के संघर्ष में हजारों सेनानियों ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। वहीं, स्वतंत्रता के तत्काल बाद हुए देश के विभाजन में लाखों लोगों को हिंसा और विस्थापन की त्रासदी झेलनी पड़ी तथा करोड़ों लोगों को रातोंरात अपने घर और व्यापार छोड़कर विस्थापित होना पड़ा। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि देश की तरक्की में अपना योगदान दें, एकता एवं अखंडता को बनाए रखें, मन लगाकर पढ़ाई करें तथा सेवा कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें। श्रीमती लिली सेठी, जगजीत कौर, बलजीत कौ...
हिमाचल की छोटी काशी मंडी में अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव पर ब्यासघाट स्थित एकादश रुद्र मंदिर में ओम नम: शिवाय जाप 14 फरवरी को सुबह नौ बजे से होगा। यह 22 फरवरी तक चलेगा। 24 ब्राह्मण दिन-रात बारी-बारी गद्दी पर बैठकर ज्योति के समक्ष यह जाप करेंगे। इस दौरान रुद्र मंदिर में अखंड ज्योति जलाई जाएगी।
एकादश रुद्र मंदिर के पुजारी स्वामी सतसुंदरम ने बताया कि शिवरात्रि महोत्सव पर मंदिर में सुबह नौ बजे अखंड ज्योति का शुभारंभ उपायुक्त ऋग्वेद ठाकुर करेंगे। उन्होंने बताया कि एक सप्ताह के पश्चात महाशिवरात्रि पर्व के दिन एकादश रुद्र भगवान का जलाभिषेक कर शृंगार किया जाएगा।
एकादश रुद्र मंदिर के पुजारी स्वामी सतसुंदरम ने बताया कि शिवरात्रि महोत्सव पर मंदिर में सुबह नौ बजे अखंड ज्योति का शुभारंभ उपायुक्त ऋग्वेद ठाकुर करेंगे। उन्होंने बताया कि एक सप्ताह के पश्चात महाशिवरात्रि पर्व के दिन एकादश रुद्र भगवान का जलाभिषेक कर शृंगार किया जाएगा।
पंचायत शैली का है एकादश रुद्र मंदिर
छोटी काशी में अनेक शिव मंदिर हैं। इनमें कई मंदिर ऐसे हैं, जहां पूरा साल धार्मिक गतिविधियां चलती रहती हैं। ब्यास नदी के किनारे झरनों के बीच स्थित एकादश रुद्र मंदिर पंचायत शैली में बनाया गया है। मंदिर का निर्माण बलवीर सेन की मां साहिबीनी ने करवाया था।
इसे शहरवासी साहिबीनी का शिवाद्वाला भी कहते हैं। साहिबीनी मंडी के राजा रहे विजय सेन की दादी थीं। कहा जाता है कि 1818 ई के आसपास एकादश रुद्र मंदिर का निर्माण किया गया था। इसमें 11 रुद्र वाले भगवान स्थापित हैं। हर रोज सुबह-शाम पूजा-अर्चना होती है।
ब्यास किनारे स्थापित होने से मंदिर का नजारा देखने वर्ष भर पर्यटकों का आना रहता है। मंदिर में सावन मास में एक माह तक भंडारा और सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं। शिवरात्रि महोत्सव व अन्य धार्मिक पर्वों में मंदिर में भक्तों का तांता लगा रहता है।
इसे शहरवासी साहिबीनी का शिवाद्वाला भी कहते हैं। साहिबीनी मंडी के राजा रहे विजय सेन की दादी थीं। कहा जाता है कि 1818 ई के आसपास एकादश रुद्र मंदिर का निर्माण किया गया था। इसमें 11 रुद्र वाले भगवान स्थापित हैं। हर रोज सुबह-शाम पूजा-अर्चना होती है।
ब्यास किनारे स्थापित होने से मंदिर का नजारा देखने वर्ष भर पर्यटकों का आना रहता है। मंदिर में सावन मास में एक माह तक भंडारा और सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं। शिवरात्रि महोत्सव व अन्य धार्मिक पर्वों में मंदिर में भक्तों का तांता लगा रहता है।
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