लखनऊ, उत्तर प्रदेश फार्मेसी कॉलेजेज एण्ड फार्मास्युटिकल इंडस्ट्रीज वेलफेयर एसोसिएशन (UPPCPIWA) की कार्यकारिणी समिति की महत्वपूर्ण बैठक आज दिनांक 24 अगस्त, 2026 को लखनऊ विश्वविद्यालय अतिथि गृह, लखनऊ में सम्पन्न हुई। बैठक की अध्यक्षता एसोसिएशन के चेयरमैन प्रो. अमरिका सिंह ने की तथा संचालन महामंत्री प्रो. दुर्गेश मणि त्रिपाठी ने किया। बैठक में सर्वसम्मति से उत्तर प्रदेश में फार्मेसी शिक्षा, अनुसंधान, उद्योग और फार्मासिस्टों के कल्याण को प्रोत्साहित करने के लिए 15 प्रतिष्ठित वार्षिक अवार्ड्स स्थापित करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया। यह अवार्ड्स फार्मेसी के जनक प्रो. महादेव लाल श्रॉफ के नाम पर राष्ट्रीय पुरस्कार सहित विभिन्न श्रेणियों में दिए जाएंगे। एसोसिएशन के महामंत्री प्रो. दुर्गेश मणि त्रिपाठी ने बताया कि उत्तर प्रदेश में वर्तमान में 2700 से अधिक फार्मेसी कॉलेज और 1900 से अधिक फार्मा इंडस्ट्रीज हैं। ऐसे में फार्मेसी प्रोफेशनल्स के मनोबल और उत्कृष्टता को सम्मानित करने के लिए इन अवार्ड्स की स्थापना की गई है। सभी अवार्ड्स को अनुमोदन हेतु फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI), नई दिल्ली को भेजा...
हिमाचल की छोटी काशी मंडी में अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव पर ब्यासघाट स्थित एकादश रुद्र मंदिर में ओम नम: शिवाय जाप 14 फरवरी को सुबह नौ बजे से होगा। यह 22 फरवरी तक चलेगा। 24 ब्राह्मण दिन-रात बारी-बारी गद्दी पर बैठकर ज्योति के समक्ष यह जाप करेंगे। इस दौरान रुद्र मंदिर में अखंड ज्योति जलाई जाएगी।
एकादश रुद्र मंदिर के पुजारी स्वामी सतसुंदरम ने बताया कि शिवरात्रि महोत्सव पर मंदिर में सुबह नौ बजे अखंड ज्योति का शुभारंभ उपायुक्त ऋग्वेद ठाकुर करेंगे। उन्होंने बताया कि एक सप्ताह के पश्चात महाशिवरात्रि पर्व के दिन एकादश रुद्र भगवान का जलाभिषेक कर शृंगार किया जाएगा।
एकादश रुद्र मंदिर के पुजारी स्वामी सतसुंदरम ने बताया कि शिवरात्रि महोत्सव पर मंदिर में सुबह नौ बजे अखंड ज्योति का शुभारंभ उपायुक्त ऋग्वेद ठाकुर करेंगे। उन्होंने बताया कि एक सप्ताह के पश्चात महाशिवरात्रि पर्व के दिन एकादश रुद्र भगवान का जलाभिषेक कर शृंगार किया जाएगा।
पंचायत शैली का है एकादश रुद्र मंदिर
छोटी काशी में अनेक शिव मंदिर हैं। इनमें कई मंदिर ऐसे हैं, जहां पूरा साल धार्मिक गतिविधियां चलती रहती हैं। ब्यास नदी के किनारे झरनों के बीच स्थित एकादश रुद्र मंदिर पंचायत शैली में बनाया गया है। मंदिर का निर्माण बलवीर सेन की मां साहिबीनी ने करवाया था।
इसे शहरवासी साहिबीनी का शिवाद्वाला भी कहते हैं। साहिबीनी मंडी के राजा रहे विजय सेन की दादी थीं। कहा जाता है कि 1818 ई के आसपास एकादश रुद्र मंदिर का निर्माण किया गया था। इसमें 11 रुद्र वाले भगवान स्थापित हैं। हर रोज सुबह-शाम पूजा-अर्चना होती है।
ब्यास किनारे स्थापित होने से मंदिर का नजारा देखने वर्ष भर पर्यटकों का आना रहता है। मंदिर में सावन मास में एक माह तक भंडारा और सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं। शिवरात्रि महोत्सव व अन्य धार्मिक पर्वों में मंदिर में भक्तों का तांता लगा रहता है।
इसे शहरवासी साहिबीनी का शिवाद्वाला भी कहते हैं। साहिबीनी मंडी के राजा रहे विजय सेन की दादी थीं। कहा जाता है कि 1818 ई के आसपास एकादश रुद्र मंदिर का निर्माण किया गया था। इसमें 11 रुद्र वाले भगवान स्थापित हैं। हर रोज सुबह-शाम पूजा-अर्चना होती है।
ब्यास किनारे स्थापित होने से मंदिर का नजारा देखने वर्ष भर पर्यटकों का आना रहता है। मंदिर में सावन मास में एक माह तक भंडारा और सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं। शिवरात्रि महोत्सव व अन्य धार्मिक पर्वों में मंदिर में भक्तों का तांता लगा रहता है।
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