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बाल कैंसर देखभाल को मिलेगी मजबूती: HBCH वाराणसी में नर्सिंग वर्कशॉप संपन्न, 95 नर्सों ने सीखे एडवांस स्किल

होमी भाभा कैंसर अस्पताल एवं महामना पंडित मदन मोहन मालवीय कैंसर केंद्र (HBCH & MPMMCC), वाराणसी में कैनकिड्स किड्सकैन तथा एक्सिस बैंक के सहयोग से पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी नर्सेज़ वर्कशॉप का सफल आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य बाल कैंसर रोगियों की देखभाल में कार्यरत नर्सिंग अधिकारियों के ज्ञान, कौशल एवं व्यावहारिक दक्षता को सुदृढ़ बनाना था। कार्यक्रम का आयोजन डॉ. अमिता महेश्वरी, निदेशक, HBCH एवं MPMMCC के संरक्षण में किया गया। कार्यक्रम में डॉ. बी.के. मिश्रा, उप निदेशक, डॉ. शशिकांत पाटने, डीन अकादमिक्स, डॉ. राघवेश रंजन, प्रभारी, पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी विभाग, तथा डॉ. सौमित्र साहा, प्रोफेसर, पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग की महत्वपूर्ण सहभागिता रही। कार्यशाला का शुभारम्भ पंजीकरण एवं प्री-टेस्ट के साथ हुआ। इस अवसर पर डॉ. योगिता भाटिया ने कैनकिड्स किड्सकैन की गतिविधियों एवं बाल कैंसर देखभाल में प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों द्वारा बाल कैंसर की पहचान एवं उपचार, न्यूट्रोपेनिक फीवर का प्रबंधन, पोषण संबंधी देखभाल, रक्त एवं...

सुंदर पिचाई फेशियल रिकॉग्निशन पर अस्थाई रोक लगाने के लिए सहमत


अल्फाबेट आईएनसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुंदर पिचाई ने यूरोपियन यूनियन की तरफ से लेटेस्ट टेक्नोलॉजी फेशियल रिकॉग्निशन पर अस्थाई रोक लगाने के प्रपोजल को मान लिया है। सुंदर पिचाई ने कहा मुझे लगता है कि सरकार को इस मामले को जल्द निपटाना चाहिए। साथ ही इस तकनीक के लिए फ्रेमवर्क भी तैयार करना होगा। उन्होंने आगे कहा है कि विशेषज्ञों को फेशियल रिकॉग्निशन तकनीक को कैसे उपयोग किया जाए, इस पर भी विचार करना होगा।


हैकर्स फेस डाटा का कर सकते हैं गलत इस्तेमाल



जैसे आपके फोन नंबर और ई-मेल आईडी के पासवर्ड डाटाबेस में स्टोर होते हैं, वैसे ही फेस का डाटा भी टेक कंपनियों के डाटा में स्टोर हो जाता है। इससे यूजर्स का डाटा लीक भी हो सकता है। हालांकि, यूजर्स के पास पासवर्ड हैक हो जाने के बाद बदलने का ऑप्शन होता है, लेकिन फेस डाटा को सुरक्षित रखने के लिए किसी तरह के विकल्प नहीं मिलते है।


सुंदर पिचाई ने एआई को लेकर दिया बड़ा बयान



सुंदर पिचाई ने कहा है कि मेरे दिमाग में कोई सवाल नहीं है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को नियंत्रित नहीं करना चाहिए। लेकिन परेशानी यह है कि इसके लिए किस तरह का दृष्टिकोण को अपनाया होगा। उन्होंने आगे कहा है हमें सुनिश्चित करना होगा कि यह तकनीक सभी यूजर्स तक अपनी पहुंच बना सके। वहीं, सुंदर पिचाई ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए गाइडलाइन बनाने पर भी जोर दिया है।



एआई तकनीक के नुकसान और फायदे के बीच संतुलना बनाना जरूरी



सुंदर पिचाई का मानना है कि इस तकनीक के लिए अलग से नियम बनाने होंगे। साथ ही गूगल इसके लिए इस्तेमाल होने वाले उपकरण में निवेश करेगा। इसके अलावा इस तकनीक से होने वाले नुकसान के लिए भी तैयार रहना होगा। वहीं, उन्होंने माना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के फायदे और नुकसान के बीच संतुलन बनाने की जरूरत है। उदाहरण के तौर पर सेल्फ ड्राइविंग कार के लिए नियम और हेल्थकेयर के लिए फ्रेमवर्क तैयार करना पड़ेगा।



 

 





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