Skip to main content

बाल कैंसर देखभाल को मिलेगी मजबूती: HBCH वाराणसी में नर्सिंग वर्कशॉप संपन्न, 95 नर्सों ने सीखे एडवांस स्किल

होमी भाभा कैंसर अस्पताल एवं महामना पंडित मदन मोहन मालवीय कैंसर केंद्र (HBCH & MPMMCC), वाराणसी में कैनकिड्स किड्सकैन तथा एक्सिस बैंक के सहयोग से पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी नर्सेज़ वर्कशॉप का सफल आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य बाल कैंसर रोगियों की देखभाल में कार्यरत नर्सिंग अधिकारियों के ज्ञान, कौशल एवं व्यावहारिक दक्षता को सुदृढ़ बनाना था। कार्यक्रम का आयोजन डॉ. अमिता महेश्वरी, निदेशक, HBCH एवं MPMMCC के संरक्षण में किया गया। कार्यक्रम में डॉ. बी.के. मिश्रा, उप निदेशक, डॉ. शशिकांत पाटने, डीन अकादमिक्स, डॉ. राघवेश रंजन, प्रभारी, पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी विभाग, तथा डॉ. सौमित्र साहा, प्रोफेसर, पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग की महत्वपूर्ण सहभागिता रही। कार्यशाला का शुभारम्भ पंजीकरण एवं प्री-टेस्ट के साथ हुआ। इस अवसर पर डॉ. योगिता भाटिया ने कैनकिड्स किड्सकैन की गतिविधियों एवं बाल कैंसर देखभाल में प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों द्वारा बाल कैंसर की पहचान एवं उपचार, न्यूट्रोपेनिक फीवर का प्रबंधन, पोषण संबंधी देखभाल, रक्त एवं...

27 साल से लापता पटना की महिला, हरिद्वार में भीख मांगती मिली

किसी बात से नाराज एक महिला अचानक घर छोड़कर कहीं चली गई। स्‍वजनों ने खोजा, लेकिन नहीं मिली। जब 27 साल बाद वह हरिद्वार में भीख मांगते मिली तो उसने घर लौटने से इनकार कर दिया। बिलकुल फिल्‍मी लगती यह कहानी पटना नगर निगम की कमर्मचारी रही रामरती देवी उर्फ मुन्‍नी के जीवन की हकीकत है।


हरिद्वार में भीख मांगते मिली पटना की महिला


बिहार से 27 साल पहले लापता हुई पटना नगर निगम की एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी बहादराबाद (हरिद्वार) में भीख मांगती मिली। दरअसल, पटना से वृद्धा का भतीजा राकेश अपने रिश्तेदार से मिलने हरिद्वार गया था। बस से उतरकर जैसे ही उसकी नजर भीख मांग रही एक वृद्धा पर पड़ी, वह अवाक रह गया। वह 27 साल पहले लापता हुईं उसकी ताई थीं। वृद्धा ने भी उसे पहचान लिया। लेकिन, घर लौटने से इनकार कर दिया। पुलिस ने अब उसके बेटे को हरिद्वार बुलाया है।


सुराग नहीं मिला तो मृत मान चुके थे स्वजन


पुलिस के मुताबिक पटना नगर निगम में चतुर्थ श्रेणी कर्मी रामरति देवी उर्फ मुन्नी वर्ष 1993 में अचानक लापता हो गईं थीं। स्वजनों ने महिला की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। कई साल तक बिहार पुलिस के साथ उसकी ढूंढ-खोज भी की। अंतत: कोई सुराग नहीं मिला तो करीब 10 वर्ष पूर्व स्वजन मान चुके थे कि महिला की मौत हो गई होगी। लेकिन शनिवार को रामरति का अचानक फिल्मी अंदाज में अपने भतीजे से आमना-सामना हो गया।


 


 


 

Comments