दिल्ली में गुरुवार को नागरिकता कानून के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शन के के चलते लोगों को भारी परेशानी से गुजरना पड़ा। लाल किला, जंतर-मंतर, मंडी हाउस और जामिया नगर में भारी प्रदर्शन किया गया। चूंकि प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई थी ऐसे में पुलिस ने तमाम सड़कें बेरिकेट्स लगाकर बंद कर दीं। इससे वाहन चालक और बस यात्री डायवर्जन में इधर-उधर घूमते रहे या 3-5 किमी तक पैदल चलने को मजबूर हुए।
ये पहला मौका था जब एक-एक करके सुबह से दोपहर बाद तक 20 मेट्रो स्टेशन सुरक्षा कारणों का हवाला देकर बंद किया गया। पुरानी दिल्ली और नई दिल्ली की सड़कें 5-6 घंटे बाद वाहनों के लिए खोली गईं तो मेट्रो के कुछ स्टेशन करीब 7 घंटे बाद खोले गए। बाकी खबर लिखे जाने तक बंद भी रहे। जामिया नगर के शाहीन बाग में विरोध के चलते सबसे पहले मथुरा रोड से कालिंदी कुंज सड़क बंद किया गया जो 6 दिन से बंद चल रहा है। फिर दिल्ली गेट से जीपीओ की सड़क बंद की गई। इसकी वजह से सुभाष मार्ग, पीली कोठी, श्यामा प्रसाद मुखर्जी मार्ग, लाल किला, पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन, पुश्ता रोड से शांति वन चौराहे तक ट्रैफिक बहुत धीमी गति से चला।
दिल्ली गेट से जीपीओ शाम 6.30 बजे खोला गया यानी करीब 7 घंटे लोग यहां से नहीं गुजर सके। नागरिकता संशोधन कानून को लेकर हुए विरोध में करीब 1200 प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हिरासत में लिया। पुलिस इन प्रदर्शनकारियों को करीब 2 दर्जन बसों में भरकर ले गई थी। इनमें से 60 को बवाना स्थित राजीव गांधी स्टेडियम में ले जाया गया। करीब 55 को नांगलोई स्थित सूरजमल स्टेडिय मे और लगभग 50 को केशवपरम में ले जाया गया। दिल्ली पुलिस के पीआरओ मंदीप सिंह रंधावा ने बताया कि उनके पास उनके पास सूचना थी कि इस प्रदर्शन की आड़ में कुछ शरारती तत्व शांति भंग कर सकते हैं। इसे देखते हुए ही कुछ इलाकों में इंटरनेट सुविधाएं कुछ समय के लिए रुकवा दी थीं।
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