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बाल कैंसर देखभाल को मिलेगी मजबूती: HBCH वाराणसी में नर्सिंग वर्कशॉप संपन्न, 95 नर्सों ने सीखे एडवांस स्किल

होमी भाभा कैंसर अस्पताल एवं महामना पंडित मदन मोहन मालवीय कैंसर केंद्र (HBCH & MPMMCC), वाराणसी में कैनकिड्स किड्सकैन तथा एक्सिस बैंक के सहयोग से पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी नर्सेज़ वर्कशॉप का सफल आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य बाल कैंसर रोगियों की देखभाल में कार्यरत नर्सिंग अधिकारियों के ज्ञान, कौशल एवं व्यावहारिक दक्षता को सुदृढ़ बनाना था। कार्यक्रम का आयोजन डॉ. अमिता महेश्वरी, निदेशक, HBCH एवं MPMMCC के संरक्षण में किया गया। कार्यक्रम में डॉ. बी.के. मिश्रा, उप निदेशक, डॉ. शशिकांत पाटने, डीन अकादमिक्स, डॉ. राघवेश रंजन, प्रभारी, पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी विभाग, तथा डॉ. सौमित्र साहा, प्रोफेसर, पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग की महत्वपूर्ण सहभागिता रही। कार्यशाला का शुभारम्भ पंजीकरण एवं प्री-टेस्ट के साथ हुआ। इस अवसर पर डॉ. योगिता भाटिया ने कैनकिड्स किड्सकैन की गतिविधियों एवं बाल कैंसर देखभाल में प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों द्वारा बाल कैंसर की पहचान एवं उपचार, न्यूट्रोपेनिक फीवर का प्रबंधन, पोषण संबंधी देखभाल, रक्त एवं...

केंद्र सरकार 2020 में प्याज का एक लाख टन का बफर स्टॉक तैयार करेगी


 

2019 में जिस तरह से प्याज ने आम आदमी और सरकार को परेशानी में डाला है, उससे सबक लेते हुए केंद्र सरकार 2020 में प्याज का एक लाख टन का बफर स्टॉक तैयार करेगी। इससे सरकार को प्याज की कीमतों पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी। 

150 रुपये के पार चली गई कीमतें


इस साल बारिश और बाढ़ के चलते प्याज की कीमतें देश के कई हिस्सों में 150 रुपये प्रति किलो के पार चली गईं। अभी भी यह कई शहरों में 100-120 रुपये की दर से मिल रहा है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि 2019 में सरकार ने 56 हजार टन प्याज का बफर स्टॉक रखा था, लेकिन मांग के चलते यह स्टॉक भी पूरा नहीं पड़ा। इसी के चलते सरकार को एमएमटीसी के जरिए विदेशों से प्याज का आयात करना पड़ा।  

नेफेड को दी जिम्मेदारी


केंद्र सरकार ने नेफेड को यह बफर स्टॉक तैयार करने की जिम्मेदारी दे दी है। नेफेड रबी फसल आने के बाद सीधे किसानों से मार्च से जुलाई के बीच प्याज को खरीदेगा। इस साल प्याज की कीमतों में इसलिए बढ़ोतरी हुई, क्योंकि खरीफ की फसल 26 फीसदी कम हुई थी, इसके बाद देरी से आए मानसून और बारिश ने महाराष्ट्र और कर्नाटक में फसल को बर्बाद कर दिया। 

कीमतों में कमी के लिए भी उठाए कदम


सरकार ने अपनी तरफ से कीमतों में कमी करने के लिए कई कदम उठाए, जिनमें से प्याज के निर्यात पर पाबंदी, व्यापारियों के लिए स्टॉक लिमिट और सस्ती दरों पर प्याज को बफर स्टॉक से बेचना शामिल था। हालांकि अब सरकार का बफर स्टॉक भी पूरी तरह से खत्म हो चुका है। अब बाजार में केवल आयातित प्याज ही बेचा जा रहा है। सरकार ने 45 हजार टन प्याज को विदेश से आयात किया है।  

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