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बाल कैंसर देखभाल को मिलेगी मजबूती: HBCH वाराणसी में नर्सिंग वर्कशॉप संपन्न, 95 नर्सों ने सीखे एडवांस स्किल

होमी भाभा कैंसर अस्पताल एवं महामना पंडित मदन मोहन मालवीय कैंसर केंद्र (HBCH & MPMMCC), वाराणसी में कैनकिड्स किड्सकैन तथा एक्सिस बैंक के सहयोग से पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी नर्सेज़ वर्कशॉप का सफल आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य बाल कैंसर रोगियों की देखभाल में कार्यरत नर्सिंग अधिकारियों के ज्ञान, कौशल एवं व्यावहारिक दक्षता को सुदृढ़ बनाना था। कार्यक्रम का आयोजन डॉ. अमिता महेश्वरी, निदेशक, HBCH एवं MPMMCC के संरक्षण में किया गया। कार्यक्रम में डॉ. बी.के. मिश्रा, उप निदेशक, डॉ. शशिकांत पाटने, डीन अकादमिक्स, डॉ. राघवेश रंजन, प्रभारी, पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी विभाग, तथा डॉ. सौमित्र साहा, प्रोफेसर, पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग की महत्वपूर्ण सहभागिता रही। कार्यशाला का शुभारम्भ पंजीकरण एवं प्री-टेस्ट के साथ हुआ। इस अवसर पर डॉ. योगिता भाटिया ने कैनकिड्स किड्सकैन की गतिविधियों एवं बाल कैंसर देखभाल में प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों द्वारा बाल कैंसर की पहचान एवं उपचार, न्यूट्रोपेनिक फीवर का प्रबंधन, पोषण संबंधी देखभाल, रक्त एवं...

5 सालों में 50 छात्रों की आईआईटी कैंपसों में हुई मौत, सबसे ज्यादा IIT गुवाहाटी में 14 मौतें


 


देश के प्रतिष्ठित आईआईटी संस्थानों के कैंपस में बीते 5 सालों में 50 छात्रों की मौत हुई है। इनमें से अधिकतर छात्रों ने सूइसाइड किया था और ज्यादातर में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का केस दर्ज किया गया। सबसे ज्यादा 14 छात्रों की मौत आईआईटी गुवाहाटी में हुई, जबकि आईआईटी मद्रास और आईआईटी बॉम्बे में 7-7 छात्रों की कैंपस में मौत हुई।

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने संसद एनके प्रेमचंद्रन के सवाल के जवाब में यह बात कही। 'द रिवॉलूशनरी सोशलिस्ट पार्टी' के सांसद ने आईआईटी मद्रास की छात्रा फातिमा लतीफ की आत्महत्या से जु़ड़ा एक सवाल पूछा था, जिसके जवाब में मानव संसाधन विकास मंत्री ने यह बात कही।


केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उन्हें कई सांसदों से इस संबंध में ज्ञापन मिला है कि फातिमा की सूइसाइड से जुड़े मामले की जांच कराई जानी चाहिए। बता दें कि आईआईटी कैंपसों में आत्महत्या के बढ़ते मामलों को लेकर मानव संसाधन मंत्रालय ने 6 साल पहले आईआईटी कानपुर के पूर्व चेयरमैन एम. आनंदकृष्णन के नेतृत्व में एक कमिटी का गठन किया था।

इस कमिटी ने पाया था कि आत्महत्या करने वाले ज्यादातर ऐसे छात्र थे, जो अकादमिक दबाव के चलते परेशानी महसूस कर रहे थे। आनंदकृष्णन ने हमारे सहयोगी अखबार चाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि उन्होंने अपनी सिफारिश में कहा था कि छात्रों के काउंसिलिंग सेवाओं में इजाफा किया जाना चाहिए।


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